Change in law: ग्वालियर-चंबल अंचल में बरकरार रहेगा डकैतों के जमाने का कानून
डकैत भले ही ग्वालियर और चंबल में खत्म हो चुके हों, लेकिन डकैतों पर सख्त कार्रवाई के लिए 43 साल पहले 1981 में जो मध्यप्रदेश डकैती व्यपहरण प्रभावित क्षे ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 30 Jun 2024 08:24:18 AM (IST)Updated Date: Sun, 30 Jun 2024 08:24:18 AM (IST)
HighLights
- आज रात 12 बजे अंग्रेजों के जमाने का कानून तो बदल जाएगा
- विशेष अधिनियम प्रभावित नहीं होंगे
- भारतीय दंड विधान अब भारतीय न्याय संहिता हो जाएगी
अमित मिश्रा.नईदुनिया ग्वालियर। आज रात 12 बजे के बाद अंग्रेजों के जमाने का कानून बदल जाएगा। देशभर में यह बदलाव लागू होगा, लेकिन क्या आपको पता है- मध्यप्रदेश के ग्वालियर और चंबल अंचल में डकैतों के जमाने का कानून अब भी बरकरार रहेगा।
चौंकिए मत..डकैत भले ही ग्वालियर और चंबल में खत्म हो चुके हों, लेकिन डकैतों पर सख्त कार्रवाई के लिए 43 साल पहले 1981 में जो मध्यप्रदेश डकैती व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम-1981 लागू किया गया था, वह अब भी बरकरार रहेगा। क्योंकि भारत सरकार ने ब्रिटिश काल में 1860 में बनाई गई भारतीय दंड विधान, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धाराओं में बदलाव किया है, विशेष अधिनियमों में नहीं।
भारतीय दंड विधान अब भारतीय न्याय संहिता हो जाएगी, लेकिन भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद भी ग्वालियर और चंबल अंचल में जब लूट की घटना के बाद एफआइआर होगी तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 309 के साथ मप्र डकैती व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम भी लागू होगा। जानिये..आखिर क्यों अब भी ग्वालियर-चंबल अंचल में बरकरार रहेगा डकैतों के जमाने का कानून।
कानून के जानकारों से जब नईदुनिया ने बात की तो स्पष्ट हुआ कि आइपीसी, सीआरपीसी की धाराएं बदल गई हैं। इनके टाइटल बदल गए हैं, लेकिन देश के जितने भी विशेष अधिनियम हैं, उनमें बदलाव नहीं हुआ है। यही वजह है- ग्वालियर-चंबल अंचल में लूट के साथ लगने वाला मप्र डकैती अधिनियम अब भी लगेगा। इसके अलावा जो भी विशेष अधिनियम हैं, वह भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ लगेंगे।
क्यों लागू हुआ था मप्र डकैती अधिनियम
- 80 के दशक में मप्र में ग्वालियर और चंबल अंचल डकैतों के आतंक से जूझ रहा था। बीहड़, जंगलों में डकैतों का कब्जा था। अपहरण, हत्या, लूटपाट रोज होती थी। अपहरण कर लाखों रुपये की फिरौती वसूली जाती थी। कई बड़े कारोबारी, अधिकारियों के अपहरण से पूरा प्रदेश दहल जाता था। इस समस्या से निपटने के लिए मप्र डकैती अधिनियम लागू हुआ था। 1981 में यह कानून लाया गया।
- लूट, अपहरण के साथ जब यह कानून लगाया जाता था तो डकैतों और उनके मददगारों को जमानत मिलना मुश्किल हो जाती थी। डकैत तो यहां से खत्म हो गए, लेकिन यह कानून अब भी यहां लागू है। लूट, डकैती की वारदातों के साथ यह कानून लगाया जाता है। मप्र डकैती अधिनियम लगने के बाद जमानत के प्रविधान बहुत कठिन हैं। लूट की वारदातों में संपत्ति राजसात करने का अधिकार है। आजीवन कारावास का प्रावधान है।
थाना प्रभारी करेंगे नए कानून में पहली एफआइआर, नागरिकों के साथ करेंगे अभिनंदन
एसपी धर्मवीर सिंह ने शनिवार रात को पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की। जिसमें नए कानून का स्वागत करने के निर्देश दिए। नागरिकों के साथ अभिनंदन किया जाएगा। पहली एफआइआर थाना प्रभारी खुद लिखेंगे और फरियादी को एफआइआर की कापी सौंपेंगे।
लव जिहाद करने वालों के खिलाफ सख्त कानून के साथ मप्र में यह भी विशेष अधिनियम बरकरार रहेंगे...
- मप्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2021: धर्म बदलकर शादी कर दूसरे को धर्म बदलने के लिए मजबूर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए यह अधिनियम लागू किया गया था। यह अब भी बरकरार रहेगा।
- मप्र निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम-2000: चिटफंड के मामलों में यह अधिनियम मप्र में वर्ष-2000 में लागू हुआ। यह बरकरार रहेगा। धोखाधड़ी की धारा के साथ सबसे ज्यादा यह अधिनियम लगता है। कई बड़ी कंपनियों पर इस विशेष अधिनियम के तहत एफआइआर हुई है।
मप्र साहूकार(संशोधन) एक्ट- 2017: साहूकारों की प्रताड़ना से परेशान लोगों के संरक्षण के लिए प्रदेश में यह विशेष अधिनियम लागू हुआ था। यह बरकरार रहेगा।
पाक्सो एक्ट: बच्चों को लैंगिंग अपराधों से संरक्षण के लिए 2012 में यह अधिनियम लागू हुआ था। यह बरकरार रहेगा। नाबालिगों के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ के मामलों धाराओं के साथ यह विशेष अधिनियम भी लगाया जाएगा।
एससीएसटी एक्ट: अनुसूचित जाती, अनुसूचित जनजाति के लोगों पर अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए यह अधिनियम 1989 में लागू हुआ था। इस वर्ग के व्यक्ति के साथ अपराध के मामले में यह अधिनियम अब भी लागू होगा।
दहेज निषेध एक्ट: दहेज जैसी कुप्रथाओं को रोकने दहेज निषेध एक्ट 1961 में लागू हुआ। दहेज प्रताड़ना के मामलों में यह अधिनियम अब भी लागू होगा। विशेष अधिनियमों में सरकार द्वारा कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कानून बरकरार रहेंगे। भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भी इन अधिनियमों के तहत कार्रवाई होगी। विशेष अधिनियम विशेष परिस्थिति, अपराधों को नियंत्रित करने के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए इनमें कोई बदलाव नहीं है।
धर्मवीर सिंह, एसपी