Cheeta Project: कूनो के खुले जंगल में छोड़े चीता ओबान और आशा
Cheeta Project: कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने नामीबिया से लाए गए नर चीता ओबान एवं मादा चीता आशा को शनिवार को खुले जंगल में छोड़ा। ...और पढ़ें
By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Sat, 11 Mar 2023 08:56:57 PM (IST)Updated Date: Sat, 11 Mar 2023 10:04:17 PM (IST)

Cheeta Project: ग्वालियर/ भोपाल , राज्य ब्यूरो। कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन ने नामीबिया से लाए गए नर चीता ओबान एवं मादा चीता आशा को शनिवार को खुले जंगल में छोड़ दिया। नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को आठ चीते लाए गए थे, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ा था। खुले जंगल में छोड़े गए चीतों की कालर आइडी के माध्यम से लगातार निगरानी की जाएगी। इसके लिए चार टीमें लगाई गई हैं, जो चौबीसों घंटे चीतों से 100 मीटर दूर रहेंगी और उन पर नजर रखेंगी। पार्क की सीमा से सटे वनमंडलों एवं पुलिस थानों को भी सचेत कर दिया गया है। किसी भी तरह की सूचना आने पर वह तुरंत अलर्ट होंगे। बता दें कि 'नईदुनिया" ने पांच मार्च को ही यह बताया था कि मार्च के दूसरे सप्ताह में चीते खुले जंगल में छोड़े जा सकते हैं।
सुबह किया ओबान को बाड़े से रिहा
वन्यप्राणी मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सुबह ओमान और दोपहर में आशा को बड़े बाड़े से रिहा किया गया। बाड़े से बाहर आते ही चीतों ने जंगल में दौड़ लगा दी और देखते ही देखते वहां उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों की आंखों से ओझल हो गए। उनकी सुरक्षा के लिए तैनात टीमें भी चीतों के साथ रवाना हो गईं। शाम तक दोनों चीते बाड़े से करीब दो किमी की दूरी पर थे। इनकी 15 दिन लगातार निगरानी की जाएगी। सब ठीक रहा तो दो चीते फिर छोड़े जाएंगे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
शिवपुरी में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) की अस्थायी इकाई गठित कर दी गई है, जो सूचना तंत्र विकसित करेगी और संदेह की स्थिति में कार्रवाई करेगी। डाग स्क्वायड को भी तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा चीता मित्र भी निगरानी रखेंगे।
पर्यटकों को दूर रखा जाएगा
जंगल में छोड़े गए चीतों से फिलहाल पार्क आने वाले पर्यटकों को दूर रखा जाएगा। इसके लिए भी इंतजाम रहेगा। जिस क्षेत्र में चीते होंगे, उस क्षेत्र में पर्यटकों को करीब एक किमी पहले ही रोक दिया जाएगा।
थानों की ली जाएगी मदद
दो चीते खुले जंगल में छोड़ दिए गए हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। इसमें पार्क के आसपास के थानों की भी मदद ली जाएगी।
जेएस चौहान, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र।