
प्रियंक शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। ग्वालियर चंबल अंचल के 19 सहित प्रदेश के 149 टोल प्लाजा अब एक ही सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) ने सभी टोल प्लाजाओं को भोपाल मुख्यालय से मैनेज्ड मल्टी प्रोटोकाल लेबल स्विचिंग (एमपीएलएस) नेटवर्क के जरिए जोड़ने की प्रक्रिया गत जुलाई माह में शुरू की थी और 3.81 करोड़ रुपये की राशि का टेंडर भी जारी किया था, लेकिन एमपीआरडीसी को इस राशि में कोई ठेकेदार नहीं मिल सका।
ऐसे में अब दोबारा मूल्यांकन कर इस प्रोजेक्ट की लागत में 20 लाख रुपये का इजाफा किया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भोपाल मुख्यालय से हर टोल प्लाजा की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी। किसी भी टोल प्लाजा पर नेटवर्क डाउन होने, कनेक्टिविटी बाधित होने, डेटा ट्रांसफर में गड़बड़ी या बैंडविड्थ कम मिलने की सूचना तत्काल मुख्यालय तक पहुंच जाएगी।
इससे टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व संग्रह की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और तकनीकी गड़बड़ियों का समय रहते समाधान किया जा सकेगा। ग्वालियर संभाग के टोल प्लाजा भी इस नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे यहां के टोल संचालन पर भी भोपाल से सीधी नजर रखी जा सकेगी।
परियोजना के तहत प्रत्येक टोल प्लाजा को समर्पित एमपीएलएस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जबकि भोपाल स्थित मुख्यालय को हाइ-स्पीड नेटवर्क हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश के सभी टोल प्लाजा एक केंद्रीकृत डिजिटल नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे। भोपाल मुख्यालय से प्रत्येक टोल प्लाजा की कनेक्टिविटी, नेटवर्क की उपलब्धता, डेटा ट्रैफिक और नेटवर्क डाउन होने जैसी तकनीकी गतिविधियों की आनलाइन निगरानी की जाएगी।
यदि किसी टोल प्लाजा का नेटवर्क बाधित होता है या डेटा ट्रांसमिशन में कोई समस्या आती है तो उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल सेंटर को मिलेगी। इससे खराबी का जल्द पता लगाकर उसे कम समय में दूर किया जा सकेगा और टोल संचालन प्रभावित नहीं होगा।
साथ ही टोल संचालन से जुड़े आंकड़ों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे राजस्व प्रबंधन, परिचालन समीक्षा और भविष्य की योजना बनाने में आसानी होगी। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल नेटवर्क तैयार होने के बाद तकनीकी बाधाओं में कमी आएगी, टोल संचालन अधिक व्यवस्थित होगा और पूरे प्रदेश में एमपीआरडीसी की सड़क परियोजनाओं की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर में हाईवे पर ओवरलोड वाहनों का खेल: NHAI ने भेजी लिस्ट, RTO ने पलटकर पूछा- टोल पर आपने क्या की कार्रवाई?
एमपीआरडीसी ने अपने भोपाल डिवीजन के 20, ग्वालियर डिवीजन के 19, छिंदवाड़ा के आठ, धार के 20, इंदौर के नौ, जबलपुर के 10, नर्मदापुरम के तीन, रीवा के 13, सागर के 15, शहडोल के नौ और उज्जैन के 23 टोल प्लाजा को इसमें शामिल किया है। ग्वालियर डिवीजन के उमरी टोल प्लाजा, देवखेड़ी, बिलौआ, लुक्की, बसवाहा, भीमपुरा, पंडोला, बरेठा, फूप, पलोथर, पगारा, फुटेरा, रतवई, चितोरा, धनेली, सौसा, मौ, मगरौनी और केरुआ टोल प्लाजा को इस प्रोजेक्ट में चिह्नित किया है।
यह भी पढ़ें- ग्वालियर-चंबल के टोल पर अब भोपाल से नजर, MPLS नेटवर्क से जुड़ेंगे MP के 149 टोल प्लाजा, रीयल टाइम मॉनिटरिंग होगी