
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित दारूल कुरआन मदरसे में बच्चियों के साथ क्ररता होती थी। बाजी और उसके बेटे-बेटी मारपीट करते थे। बच्चियों को पढ़ाई से दूर रखा जाता था, बच्चियां जमीन पर सोती थीं। बालकों के शौचालय में दरवाजे नहीं थे। एक-एक कमरों में बच्चों को रखा जाता था। मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की दारूल कुरआन मदरसे के मामले में मंगलवार को जारी हुई रिपोर्ट में यह सामने आया है।
आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने ग्वालियर जिले के सभी मदरसों व ऐसे स्थान जहां बालक बालिकाएं रहते हैं उनकी जांच के आदेश दिए हैं। दारूल कुरआन मदरसे में बच्चियों व बालकों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों पर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सात दिन में आयोग ने निर्देशों के तहत रिपोर्ट भी मांगी है।
बता दें कि 23 अक्टूबर को मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने अधिकारियों के साथ शिकायत के आधार पर एजी ऑफिस स्थित मदरसा दारूल कुरआन पर छापा मारा था जिसमें 26 बच्चे मौके पर मिले। इनमें आठ बच्चियां व शेष बालक थे।
मौके पर जांच में पता चला कि बच्चियों के साथ मारपीट होती थी व पढ़ाई से दूर रखा जाता था। बच्चियों के हंसने तक पर पाबंदी लगाई गई थी। सभी को रेस्क्यू कर बालक व बालिका गृहों में भेजा गया। मौके पर मदरसा प्रबंधन कोई वैध दस्तावेज नहीं दे सका। इसके बाद जांच पड़ताल का सिलसिला आगे बढ़ा।
नईदुनिया की टीम ने रविवार के अंक में "मदरसे में पढ़ाई व धर्म शिक्षा दोनों के नियम, हकीकत-जिम्मेदार सोए-कुछ भी स्पष्ट नहीं" शीर्षक से मदरसों की स्थित को सामने रखा था। इसके बाद ग्वालियर के अधिकारियों से लेकर भोपाल तक हलचल मची और अब मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग ने भी अपनी फायनल रिपोर्ट में ग्वालियर के सभी मदरसों की जांच के आदेश जारी किए हैं।
वहीं नईदुनिया ने ही दारूल कुरआन मदरसे में बाजी नजमा, साबिर और अनस के नाम दिए जिनके द्वारा बच्चियों को प्रताड़ित किया जाता था, आयोग ने अपनी रिपेार्ट में इनका उल्लेख भी किया है।
संपूर्ण मामले की विस्तृत जांच की जाये। बालिकाओं एवं बालकों से बातचीत के आधार पर प्रथम दृष्टया किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 75-79, बालक और कुमार (श्रम प्रतिषेध और विनियम) अधिनियम 1986 की धारा 3 एवं बालकों की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं नियम 2010 की धारा 3 का उल्लंघन प्रतीत होता है। जांच कर दोषियों के विरूद्ध उचित वैद्यानिक कार्यवाही की जाये एवं की गई वैद्यानिक कार्यवाही से आयोग को अवगत करायें।
जिले में इस प्रकार के संचालित अन्य मदरसों की या बिना किसी मान्यता के बालक-बालिकाओं की आवासीय संस्थाओं की भी जांच कराई जाये और यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना मान्यता के कोई भी संस्था जिले में संचालित ना हो, जिसकी रिपोर्ट आयोग को किया जाना सुनिश्चित करें।
निरीक्षण के दौरान मदरसे में पंजीकृत बालक-बालिकाओं से संबंधित एवं मदरसे की संचालन समिति से संबंधित जप्त किये गये समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति आयोग को उपलब्ध करायें। बालक-बालिकाओं के बालगृह एवं बालिका गृह में प्रवेश आदेश, सुपुर्दगी आदेश, एसआइआर, काउंसलिंग रिपोर्ट एवं मेडिकल रिपोर्ट के दस्तावेज की छायाप्रति उपलब्ध कराए जायें। इसके अलावा मदरसे के बच्चों के जिन स्कूलों मे प्रवेश के बाद न जाने पर भी अटेंडेंस दर्ज हो रही उनपर कार्रवाई हो।
1. मदरसा को मदरसा बोर्ड से मान्यता नहीं है।बच्चों द्वारा मदरसों में रात में 2 बाउंसर के आने और मारपीट करने की बात बताई गई। बिना मान्यता के संस्था द्वारा आवासीय मदरसा चलाया जा रहा है। मदरसे की संचालन समिति का आय-व्यय की जानकारी मप्र सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 (सन 1973 का क. 99) की धारा 27 की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
उपलब्ध कराये गये दस्तावेज अनुसार अंजुमन इस्लाहे मुशायरा समिति जिसके द्वारा मदरसा संचालित होना बताया गया है के वर्तमान संचालन समिति संबंधी कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये गये हैं। जो सूची उपलब्ध करायी गई है वह जुलाई 2026 तक की मान्य है।
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2. निरीक्षण के समय मदरसे में 18 बालक और 8 बालिकायें मिली हैं जबकि 16 बालिकाओं और 42 बालकों के पंजीयने फार्म मिले हैं जिनकी आयु 4 वर्ष से 14 वर्ष के बीच है। पूछने पर बच्चों ने कभी स्कूल न जाने की बात कही। दो बालकों के माता-पिता की मृत्यु हो गई है ऐसा ज्ञात हुआ जिसके संबंध में बाल कल्याण समिति को जानकारी नहीं दी गई।
स्टाफ सूची, स्टाक रजिस्टर, पंजी कोई दस्तावेज नहीं, महिला वार्डन नहीं। कैमरों की डीवीआर नहीं दी गई, जावेद,मोहम्मद शाकिर व साबिर यह स्कूलों में अटेंडेंस लगवाते थे। बच्चियों से पूरा काम झाडू पौंछा व बर्तन साफ कराए जाते थे। एक कमरे मे 21 बच्चे रहते थे।
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