
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। महाराष्ट्र के मदरसों में धार्मिक शिक्षा के लिए ले जाने के दौरान मध्य प्रदेश के कटनी जिले में रोककर संरक्षण में लिए गए बिहार के 167 बच्चों के मामले की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इतनी दूर जिन मदरसों में बच्चों को प्रवेश के लिए ले जाया जा रहा था, उनके प्रबंधन ने अभिभावकों से मनमाना और गैरजिम्मेदाराना अनुबंध किया था।
दरअसल, मदरसों के प्रबंधन ने अपने अनुबंध में अभिभावकों से स्पष्ट कर दिया था कि पढ़ाई के दौरान यदि उनका बच्चा भाग जाता है या गुम हो जाता है तो इसके लिए मदरसों की जिम्मेदारी जरा भी नहीं होगी।
इस बारे में मदरसा की ओर से सिर्फ उनको सूचना ही दी जाएगी, कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई जाएगी। इस अनुबंध से मदरसों में बच्चों के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैये का साफ पता लगता है। इस अनुबंध से कटनी की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और बिहार के समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर अवगत कराया है।
इससे संबंधित नियमों की जांच और कार्रवाई के लिए लिखा है। कहा है कि यदि बच्चों को मदरसों के संरक्षण में दिया जाना था, तो उनके संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी भी मदरसों के संचालकों की ही होनी चाहिए। यदि वे जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं तो किस आधार पर बच्चों को बिना सुरक्षा के छोड़ा जा रहा था।
बता दें कि गत 11 अप्रैल को बिहार के अररिया जिले से 167 बच्चों को पटना-पुणे ट्रेन से महाराष्ट्र के लातूर व नांदेड़ शहरों में स्थित मदरसों में ले जाया जा रहा था। कटनी रेलवे स्टेशन पर बाल कल्याण समिति, आरपीएफ व जीआरपी ने ट्रेन से उतारकर अपने संरक्षण में ले लिया। सीडब्ल्यूसी ने जीआरपी में बच्चों को ले जाने वाले आठ लोगों पर मानव तस्करी का मामला दर्ज कर जांच की। इन आठों ने स्वयं को मदरसों का शिक्षक बताया।
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बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर उनके बयान लिए गए तो उन्होंने कहा कि अपनी मर्जी से बच्चों को मदरसों में धार्मिक शिक्षा देने के लिए भेजा था। इसके बाद कटनी और जबलपुर के बाल आश्रय गृहों में रखे गए सभी बच्चों को गुरुवार को वापस बिहार भेज दिया गया। फिलहाल, इस अनुबंध की कानूनी वैधता और बच्चों की सुरक्षा के पहलुओं पर उच्च स्तरीय जांच जारी है।