
Dhumeshwar Mahadev: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। रामस्नेही संपदाय वरिष्ठ संत रामप्रसाद महाराज ने द्वादश ज्योतिर्लिंग सत्संग में बताया कि ग्वालियर मूल रूप से शिव नगरी है। इसकी चारों दिशाओं में देवाधिदेव महादेव कोटेश्वर, गुप्तेश्वर, मंगलेश्वर, धूमेश्वर, गिरगांव के महादेव व मध्य भगवान अचलनाथ विराजित हैं। यहां के वाशिंदों की भगवान शिव में अटूट आस्था है। महाशिवरात्रि का पर्व मनाने के लिए मात्र एक महीना शेष है। जिले में प्राचीन शिव मंदिरों की श्रृंखला है। इन्ही श्रृंखलाओं में जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर की दूरी पर भितरवार तहसील में ग्राम सांखनी में पार्वती नदी के तट पर धूमेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है।
अंचल में ऐसी मान्यता है कि प्राकृतिक स्थल धूमेश्वर मंदिर में विराजमान शिवलिंग का प्राकट्य पार्वती नदी से हुआ है। इस शिवलिंग पर पार्वती का विशाल झरना अभिषेक करता था। सूर्यदेव की पहली किरण शिवलिंग पर पड़ती है। ऐसा मानना है कि भगवान सूर्य नारायण भी उदय होने के साथ सबसे पहले धूमेश्वर महादेव के दर्शन कर आगे बढ़ते हैं। तेज बहाव के कारण करीब 500 फीट की ऊंचाई से पानी गिरने के कारण धूमेश्वर धाम नाम पड़ा था। यह मंदिर इतिहास की कड़ियों और श्रद्धा की माला की तरह जुड़ा हुआ है। हर साल पार्वती नदी में बहाव तेज हाेता है, जो धूमेश्वर धाम की चौखट काे छूकर ही शांत होता है। जबकि नदी के बहाव से मंदिर करीब 200 से 250 मीटर की दूरी पर है। मान्यता है कि इस प्रकार से माता पार्वती, महादेव के दर्शनों के लिए आती हैं। महाशिवरात्रि को मंदिर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है। प्राचीन मंदिर के चारों तरफ नजर आने वाली मूर्तियां कई तरह के रहस्यों से जुड़ी हुई हैं।
बड़ी-शिलाओं से बना यह मंदिर आज भी लोगों के लिए चर्चा का केंद्र बनता रहता है। इतिहासकारों का मानना है कि धूमेश्वर मंदिर नागवंशियों के समय में बनाया गया था। बाद में ओरछा के राजा वीर सिंह देव ने वर्ष 1605-1627 के बीच जिसे बेहतर रूप से बनवाया। इसके बाद 1936-1938 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार ग्वालियर के शासक महाराजा जियाजी राव सिंधिया द्वारा करवाया गया था। धूमेश्वर मंदिर राजपुताना शैली में नजर आता है। पहले मंदिर का सिर्फ गर्भगृह था, जो अद्भुत कलाल्मकता के साथ बना हुआ है। जिसका अगला हिस्सा बाद में निर्मित कराया गया।
ग्वालियर से 57 और भितरवार से 14 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन धूमेश्वर महादेव मंदिर भक्तों की आस्था का विशेष केंद्र है। ग्वालियर से डबरा व भितरवार मार्ग होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है। मकोड़ा से छीमक रोड होते हुए भी धूमेश्वर पहुंच सकते हैं। इस मार्ग से जाने पर 20 किमीमीटर दूरी कम हो जाती है। धूमेश्वर महादेव के दर्शन करने के लिए पूरे साल भक्त पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि एक रात में कराया था।
धूमेश्वर धाम अंचल के ही नहीं आसपास के राज्यों के शिवभक्तों के लिए आस्था का केंद्र हैं। पार्वती नदी के तट पर स्थित शिवालय के दर्शन करने के लिए काफी संख्या में भक्त प्रतिदिन पहुंचते हैं। श्रवण मास और महाशिवरात्रि पर यहां मेला जैसे वातावरण रहता है। बारिश के मौसम प्रकृति प्रेमी भी काभी संख्या में पहुंचते हैं। शिवभक्तों की मान्यता है कि धूमेश्वर धाम के दर्शन करने मात्र से सारे कष्टों का निवारण स्वत: हो जाता है। महाशिवरात्रि पर यहां लगने वाले मेला की तैयारियां शुरु हो गईं हैं। क्योंकि महाशिवरात्रि पर दर्शनों के लिए काफी संख्या ग्रामीण आते हैं।