Digital Arrest: रिटायर्ड नारकोटिक्स अधिकारी पत्नी सहित डिजिटल अरेस्ट, पैसे भेजने से पहले पहुंचे साइबर सेल
ग्वालियर में रिटायर्ड नारकोटिक्स अधिकारी राकेश गुप्ता और उनकी पत्नी को साइबर ठगों ने सीबीआई अफसर बनकर डिजिटल अरेस्ट का झांसा दिया और 1.11 लाख रुपये का ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 11 Nov 2024 10:18:58 PM (IST)Updated Date: Mon, 11 Nov 2024 10:18:58 PM (IST)
साइबर सेल की मदद से ठगी से बच पाए दंपती।HighLights
- साइबर ठगों ने CBI अधिकारी बनकर ठगी की कोशिश
- रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट का झांसा दिया
- एक लाख रुपये का आरटीजीएस करने का दबाव डाला।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में रहने वाले रिटायर्ड नारकोटिक्स अधिकारी राकेश गुप्ता और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। मनी लांड्रिंग के केस में संपत्ति जब्त करने तक की धमकी दे डाली। सुबह से रात तक दंपती को इतना डरा दिया कि इन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया। ठगों के बताए अनुसार आरटीजीएस करने बैंक पहुंच गए।
पैसा जमा करने से पहले पहुंचे सायबर सेल
फार्म भरा ही था, तभी कुछ संदेह हुआ तो डरते हुए एसपी ऑफिस स्थित साइबर सेल पहुंच गए। यहां साइबर सेल ने उन ठगों से बात की और किन नियमों के तहत यह कार्रवाई हो रही है, इसके बारे में जैसे ही पूछा तो वाट्सएप वीडियो कॉल काट दिया गया। ठगों ने नंबर तक ब्लॉक कर दिया। रिटायर्ड नारकोटिक्स अधिकारी की समझदारी और साइबर सेल की सक्रियता से वह ठगे जाने से बच गए।
सीबीआई अफसर बनकर डिजिटल अरेस्ट
राकेश गुप्ता के पास 10 नवंबर को सुबह अंजान नंबर से वाट्सएप पर वायस कॉल आया। वाइस कॉल करने वाले ने कहा कि वह सीबीआई मुख्यालय से बात कर रहा है। सीबीआई द्वारा नरेश गोयल नाम के अपराधी को मनी लांड्रिंग केस में पकड़ा गया था। इससे 200 क्रेडिट कार्ड जब्त हुए। इसमें से एक कार्ड उनके नाम पर है।
उनके नाम 17 एफआईआर हैं और सुप्रीम कोर्ट के दो वारंट जारी हुए हैं। उन्हें गिरफ्तार करने के आदेश हैं। उम्र को देखते हुए डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। राकेश बुरी तरह घबरा गए। पत्नी से बात की तो दोनों को ही वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। उन्हें धमकाया गया कि अगर कमरे से बाहर भी निकले तो एक घंटे में टीम वहां पहुंचकर गिरफ्तार कर लेगी। एक लाख 11 हजार 930 रुपये आरटीजीएस करने के लिए कहा।
बैंक जाते समय पहुंचे साइबर सेल
रात में उनका मोबाइल बंद हो गया, सुबह मोबाइल चालू होते ही फिर फोन आए। इसके बाद दंपती बैंक पहुंचा और वहां से साइबर सेल। बैंक में फार्म तक भर लिया था। अचानक कुछ संदेह हुआ तो साइबर सेल पहुंचकर जानकारी दे दी, फिर साइबर सेल ने उन्हें बताया कि इस तरह कभी कोई भी जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।