
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। जिला कोर्ट ने लूट और अवैध हथियार रखने के मामले में पुलिस की जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने आरोपित अमित उर्फ प्यारे उर्फ संजय शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए दोष मुक्त कर दिया।
अदालत के फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। निर्णय ने पुलिस की विवेचना में आई कमियों को सवालों के घेरे में लिया है।
अदालत के फैसले में जब्ती की कार्रवाई और पुलिस की जांच से जुड़े साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। निर्णय के अनुसार, पुलिस गवाहों के बयानों से कथित जब्ती को संदेह से परे साबित नहीं किया जा सका।
स्वतंत्र गवाहों को शामिल करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रही। गवाह आरक्षक अंकित शर्मा की गवाही में यह बात सामने आई कि स्वतंत्र गवाह को सूचना-पत्र नहीं दिया था।
रेलवे स्टेशन जाते समय बैग लूटने का आरोप
अभियोजन के अनुसार, तीन और चार नवंबर 2025 की दरमियानी रात करीब 12:15 बजे फरियादी सौमित्र वर्मा भोपाल रेलवे स्टेशन जाने के लिए निकले थे। पड़ाव क्षेत्र में निकुंज मोटर्स के सामने आम रास्ते पर मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों द्वारा उनका बैग छीनने का आरोप लगाया गया।
बैग में लेनोवो कंपनी का लैपटॉप, 1,500 रुपये और कपड़े रखे होने की बात कही गई थी। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सह-आरोपी कल्लू उर्फ राहुल सिकरवार से मिली कथित जानकारी के आधार पर अमित शर्मा के घर से लैपटाप, चार्जर और बैग तथा घर के बाहर से मोटरसाइकिल जब्त किए जाने का दावा किया। इसके अलावा अमित के पास से 315 बोर का देसी कट्टा और एक कारतूस मिलने का आरोप भी लगाया गया।
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स्वतंत्र गवाहों की कमी और जब्ती पर सवाल
अदालत ने यह भी माना कि सह-आरोपित से मिली जानकारी के आधार पर अमित को अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त ठोस प्रमाण नहीं थे। फरियादी सौमित्र वर्मा की गवाही से भी आरोपित या आरोपितों में से किसी के घातक हथियार से लैस होने की बात प्रमाणित नहीं हुई। हथियार की कथित बरामदगी और आरोपित के कब्जे को लेकर भी अभियोजन पक्ष पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं कर सका।
साक्ष्य साबित नहीं कर सका अभियोजन
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी पूरी कड़ी प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे सिद्ध हो सकें।
इसी आधार पर 30 सितंबर 2026 को अमित उर्फ प्यारे उर्फ संजय शर्मा को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं, मध्य प्रदेश डकैती एवं व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
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