Environmental problems: बढ़ रही हैं मुश्किलें क्योंकि जल, वायु, ध्वनि और मृदा प्रदूषण बढ़ रहा
Environmental problems: पर्यावरणीय घटकों के आधार पर पर्यावरणीय प्रदूषण को भी ध्वनि, जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण आदि में बांटा जाता है । ...और पढ़ें
By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Thu, 11 May 2023 01:19:43 PM (IST)Updated Date: Thu, 11 May 2023 01:19:43 PM (IST)

Environmental problems: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हमारी अनभिज्ञता के कारण प्रदूषण बड़ रहा है। पर्यावरण के किसी भी घटक में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन, जिससे जीव जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण में मानव की विकास प्रक्रिया, औद्योगिकीकरण तथा नगरीकरण आदि का महत्वपूर्ण योगदान है। पर्यावरणीय घटकों के आधार पर पर्यावरणीय प्रदूषण को भी ध्वनि, जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण आदि में बांटा जाता है । सभी जीव अपनी वृद्धि एवं विकास तथा अपने जीवन चक्र को चलाने के लिए संतुलित पर्यावरण पर निर्भर करते हैं।
वंदना सिंह,पर्यावरण प्रेमी ने बताया कि संतुलित पर्यावरण से तात्पर्य एक ऐसे पर्यावरण से है, जिसमें प्रत्येक घटक एक निश्चित मात्रा एवं अनुपात में उपस्थित होता है। परंतु कभी-कभी मानवीय या अन्य कारणों से पर्यावरण में एक अथवा अनेक घटकों की मात्रा आवश्यकता से बहुत अधिक बढ़ जाती है अथवा पर्यावरण में हानिकारक घटकों का प्रवेश हो जाता है। इस स्थिति में पर्यावरण दूषित हो जाता है तथा जीव समुदाय के लिए किसी न किसी रूप में हानिकारक सिद्ध होता है। पर्यावरण में इस अनचाहे परिवर्तन को ही ‘पर्यावरणीय प्रदूषण’ कहते हैं।इसकी रोकथाम के लिए जरुरी है कि ऐसे घटक जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं उनके उत्सर्जन पर रोक लगानी होगी। तभी पर्यावरण को स्वच्छ बनाया जा सकता है। जल,वायु,ध्वनि व मृदा प्रदूषण हमें अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। सबसे अधिक मृदा व जल प्रदूषण नुकसान पहुंचा रहा है। क्योंकि दूषित होती मृदा में पैदा हो रही फसल का सेवन हम करते हैं इसी तरह से दूषित होता जल का सेवन भी किसी न किसी रुप में गृहण कर लेते हैं। ऐसे में यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। क्योंकि फसल की पैदावार अधिक बढ़ाने के चक्कर में अंधाधुंध तरीके से फर्टीलाइजर का उपयोग हो रहा है जो नुकसानदायक है। इसलिए सरकार मृदा प्रदूषण,वायु,ध्वनि और जल प्रदूषण रोकने के लिए कदम उठा चुकी हैं अब बारी है हम सचेत हों और प्रदूषण की रोकथाम के लिए आगे कदम बढ़ाएं।
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