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ग्वालियर में सात गांवों में 250 हैक्टेयर फसल बर्बाद, किसानों के खेतों तक पहुंची सर्वे टीम

वर्तमान में खेतों में गेहूं व सरसों की फसल पकी नहीं हैं। बालियां ही निकल रही हैं। ऐसे में अभी क्राप कटिंग विधि से फसलों में नुकसान का सर्वे नहीं हो सक...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 06 Feb 2026 01:50:26 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Feb 2026 01:54:43 PM (IST)
ग्वालियर में सात गांवों में 250 हैक्टेयर फसल बर्बाद, किसानों के खेतों तक पहुंची सर्वे टीम
ओलावृष्टि प्रभावित भौरी गांव में फसलों में नुकसान का सर्वे करता दल।

HighLights

  1. सबसे अधिक प्रभावित है कछौआ गांव जहां के चार सौ किसानों के खेतों का सर्वे कर चुका है दल
  2. सात दल कर रहे हैं फसलों में नुकसान का सर्वे, हर प्रभावित खेत का करना है नुकसान का आंकलन
  3. ओलावृष्टि के दौरान कछौआ, भौंरी जैसे गांवों में तो ओलों की तीन से चार इंच की चादर बिछ गई थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दो व तीन फरवरी की रात में चीनोर क्षेत्र के सात गांवों में हुई ओलावृष्टि से फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए सर्वेदल मैदान में उतर गए हैं। प्रशासन ने नुकसान के सर्वे के लिए सात दलों का गठन किया है। इन दलों में राजस्व, कृषि विभाग व पंचायत के कर्मचारी हैं।

गुरुवार तक ओलावृष्टि प्रभावित गांवों के सात सौ से अधिक किसानों के खेतों हुए नुकसान का आंकलन ये दल कर चुके थे। यहां करीब 250 हैक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। सर्वे दलों को तीन दिन में नुकसान के सर्वे की रिपोर्ट भू अभिलेख कार्यालय को देनी है।


यहां बता दें कि दो व तीन फरवरी को चीनोर तहसील के गांव चीनोर, कछौआ, बड़की सराय, सिकरौदा, भौरी, खुर्दपार्क, जुझारपुर सहित करीब एक दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई थी और खेत में खड़ी गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों में 90 प्रतिशत का नुकसान हुआ था।

ओलों की चादर बिछ गई थी

यहां बता दें कि चीनोर क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि के दौरान कछौआ, भौंरी जैसे गांवों में तो ओलों की तीन से चार इंच की चादर बिछ गई थी। हालांकि सात गांवों के अलावा अन्य गांवों में कम नुकसान की खबर हैं। ओलावृष्टि के बाद कलेक्टर सहित प्रशासन के अफसर मैदान में उतर गए थे और दल गठित कर नुकसान का सर्वे करने के आदेश दिए थे।

कृषि विभाग के मैदानी अफसरों की माने तो इन सात गांवों में चार से पांच सौ हैक्टेयर में खड़ी फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। दो दिन बाद सर्वे समाप्त होने के बाद ही पीडि़त किसानों व प्रभावित क्षेत्रफल सामने आ पाएगा।

सबसे अधिक प्रभावित है कछौआ गांव

ओलावृष्टि से सातों गांवों में सबसे अधिक प्रभावित गांव चीनोर का कछौआ गांव है। अकेले कछौआ गांव के ही चार सौ किसानों के खेतों का सर्वे गुरुवार तक हो चुका है। इसके अलावा छह गांवों के पीडि़त किसानों की संख्या गुरुवार तक 300 है। यानि कुल मिलाकर गुरुवार तक सात सौ किसानों के खेतों तक सर्वे दल पहुंच चुके हैं।

दो से तीन दिन बाद आएगी सही स्थिति सामने

राजस्व विभाग के अफसरों का कहना है कि ओलवृष्टि से नुकसान की सही स्थिति आगामी दो से तीन दिन में सामने आ पाएगी। क्योंकि ओलावृष्टि के तुरंत बाद नुकसान की स्थिति का आकलन नहीं हो पाता। नुकसान एक से दो दिन में ही सामने आता है।

नजरिया और नेत्रांकन विधि से हो रहा है सर्वे

वर्तमान में खेतों में गेहूं व सरसों की फसल पकी नहीं हैं। बालियां ही निकल रही हैं। ऐसे में अभी क्राप कटिंग विधि से फसलों में नुकसान का सर्वे नहीं हो सकता है। सर्वे करने वाले दलों के लोगों के मुताबिक अभी नेत्रांकन विधि, यानि फसलों में जितना नुकसान दिख रहा है, उस आधार पर वे सर्वे करते हैं। इसमें खेत-दर-खेत जाकर नुकसान का आंकलन किया जाता है। टीम खेत में रैंडमली कुछ हिस्से चुनती है और वहां पौधों की स्थिति देखती है।

नुकसान के आकलन का पैमाना

  • 33 प्रतिशत से कम नुकसान : इस स्थिति में आमतौर पर शासन की ओर से कोई बड़ी राहत राशि (मुआवजा) देय नहीं होती।
  • 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान : केवल इसी स्थिति में किसान मुआवजे या 'राहत राशि' का हकदार होता है।

सर्वे के दौरान इस तरह बनती है रिपोर्ट

सर्वे अंत में एक रिपोर्ट तैयार की जाती है जिसे पंचनामा कहते हैं। इसमें किसान का नाम और खसरा नंबर, बोई गई फसल का नाम, ओलावृष्टि का समय और तीव्रता, कुल रकबा और उसमें से क्षतिग्रस्त हिस्सा का विवरण तैयार किया जाता है। यदि किसी तरह की पशु हानि होती है तो उसका भी उल्लेख किया जाता है।

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जल्द ही रिपोर्ट दे दी जाएगी

गुरुवार तक ओला प्रभावित सातों गांवों के सात सौ के करीब किसानों के खेतों में नुकसान होने की सूची आई है। अभी सभी सर्वे चल रहा है। अभी किसानों की संख्या बढ़ेगी। सबसे अधिक प्रभावित गांव कछौआ है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार कर दे दी जाएगी। रुचि अग्रवाला, तहसीलदार चीनोर