Gwalior Education Scam: बीएड छात्रों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर हड़पी आवास राशि, जांच समिति की रिपोर्ट भी गायब
ग्वालियर के दो बीएड कॉलेजों में छात्रों की आवास योजना राशि फर्जी दस्तावेजों के जरिये निकालने की शिकायत कलेक्टर से हुई है। आरोप है कि मामले की जांच रिप...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 03:34:54 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 03:34:54 PM (IST)
बीएड छात्रों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोलकर हड़पी आवास राशि। (फाइल फोटो)HighLights
- ग्वालियर में बीएड छात्रों की आवास योजना में फर्जीवाड़ा।
- फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों से निकाली गई आवास राशि।
- बिना सहमति दूसरे बैंकों में खुलवाए गए छात्रों के खाते।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: बीएड छात्रों की आवास योजना की राशि में फर्जी दस्तावेज व हस्ताक्षर के आधार पर निकाले जाने की शिकायत प्रशासन के पास पहुंची है। इस मामले में बताया गया है कि संभागायुक्त के निर्देश पर जांच समिति का गठन भी हुआ था, लेकिन इसके बाद रिपोर्ट कहां गई पता नहीं है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने को लेकर कलेक्टर ग्वालियर को शिकायती आवेदन दिया गया है। शिकायत में गंभीर आरोप है कि छात्रों की जानकारी के बिना आवास राशि के लिए कई तरह के फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। इस मामले में जांच समिति की रिपोर्ट भी दबाने का आरोप लगाया गया है।
जांच समिति गठित, लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं
- शिकायतकर्ता महाराज सिंह के अनुसार संभागायुक्त, कलेक्टर और शासन को आदर्श कॉलेज ऑफ एज्युकेशन, बड़ागांव, मुरार, जिला ग्वालियर तथा इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल एंड टेक्निकल एजुकेशन, पिपरौली, जिला ग्वालियर में बीएड में अध्ययनरत छात्रों की आवास योजना की राशि के संबंध में फर्जी दस्तावेज, फर्जी हस्ताक्षर एवं अन्य अनियमितताओं की शिकायत की गई थी।
- अधिकारियों द्वारा जांच समिति-जांच दल भी गठित किया गया था। जांच समिति के समक्ष संबंधित छात्रों के कथन एवं उपलब्ध दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए हैं। इसके बाद भी रिपोर्ट का पता नहीं है।
फर्जी हस्ताक्षर और नए बैंक खातों से निकाली गई राशि
- शिकायत में बताया है कि उक्त दोनों महाविद्यालयों में बीएड में अध्ययनरत छात्रों की आवास योजना की राशि के संबंध में अनियमितता की गई है।
- पीड़ित छात्रों की जानकारी अथवा सहमति के बिना कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर, किरायेनामा, परिवार आई.डी. एवं अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया गया। कुछ छात्रों के पहले से बैंक खाते उपलब्ध होने के बावजूद उनके नाम से अन्य बैंकों में खाते खुलवाए जाने तथा उन्हीं खातों में आवास योजना की राशि डलवाई गई।