
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में एक ओर जहां रोजगारोन्मुखी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय की प्लेसमेंट सेल केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है। स्थिति यह है कि कागजों में भले ही प्लेसमेंट प्रभारी नियुक्त किए गए हों, लेकिन जमीनी स्तर पर इस सेल के माध्यम से छात्रों को नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसके कारण युवा भटकने को मजबूर हैं।
छात्रों का कहना है कि प्लेसमेंट सेल के सुचारू रूप से कार्य न करने का सबसे बड़ा कारण प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और पदों का गलत संयोजन है। जिस अधिकारी को प्लेसमेंट सेल का प्रभारी बनाया गया है, उनके पास निजी महाविद्यालयों की संबद्धता और मान्यता तय करने जैसा बेहद संवेदनशील और व्यस्त कार्यभार भी है। ऐसे में मान्यता और संबद्धता से जुड़े भारी-भरकम कार्यों के दबाव के चलते वे प्लेसमेंट सेल की गतिविधियों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पा रहे हैं, जिसका खमियाजा सीधे तौर पर विश्वविद्यालय के छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
जेयू के अफसरों की माने तो पिछले छह साल यानि कोरोना काल से जेयू में कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं आई हैं। वजह यही है कि प्लेसमेंट सेल ठीक से काम नहीं कर रही है। यहां तक कि एक व्यवस्थित कार्यालय तक नहीं है। जबकि इसके उलट प्रायवेट कालेज व विश्वविद्यालय अपने छात्रों को प्रवेश ही प्लेसमेंट के आधार पर देते हैं।
विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और पढ़ाई पूरी करते ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कई विशेष वोकेशनल व प्रोफेशनल कोर्स चलाए जाते हैं। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लेते समय छात्रों को बेहतर प्लेसमेंट के सपने दिखाए जाते हैं, लेकिन सेल की निष्क्रियता के कारण विद्यार्थियों की उम्मीदें धरी की धरी रह जाती हैं। कैंपस इंटरव्यू या कारपोरेट घरानों से समन्वय स्थापित न होने के कारण छात्र डिग्री हाथ में होने के बावजूद दर-दर भटकने को विवश हैं।
कोरोना के बाद से प्लेसमेंट का स्वरूप बदल गया है। अब कंपनियां विश्वविद्यालय से छात्रों का डाटा ले लेती हैं। इसके बाद कंपनियां अपने आप छात्रों को आनलाइन या आफलाइन बुलाती हैं। ऐसे में किस कोर्स से कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला, इस बात का डाटा प्लेसमेंट सेल के पास नहीं रहता। ऐसे में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जेयू में प्लेसमेंट सेल काम तो कर रही है, लेकिन अब कैंपस प्लेसमेंट के लिए कंपनियां नहीं आती। वे डाटा ले लेती हैं। इसके बाद वे छात्रों से बात करती हैं। इससे यह पता नहीं लगता कि किस कोर्स से कितने छात्रों को प्लेसमेंट मिला है। प्रो. शांतिदेव सिसोदिया, प्रभारी प्लेसमेंट सेल जेयू