
Gwalior News: ग्वालियर (नप्र)। 28 दिन के अंदर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से रेलवे स्टेशन पर एक और यात्री की जान चली गई। अपनी मां के साथ ग्वालियर से रतलाम के लिए रवाना हो रहा युवक ट्रेन के एसी कोच में चढ़ते ही बेहोश हो गया। रेलवे का स्टाफ बेहोश युवक को ट्रेन से उतारकर प्लेटफार्म पर लाया और एंबुलेंस को सूचना दी। उधर युवक की मां ने स्वजन को फोन कर दिया। मामा का बाजार से युवक के स्वजन स्टेशन पहुंच गए, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। ऐसे में निजी वाहन में युवक को लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। युवक के स्वजन ने रेलवे और एंबुलेंस सेवा पर लापरवाही का आरोप लगाया हैं।
इससे पहले गत 10 और 11 दिसंबर की दरमियानी रात पीके यूनिवर्सिटी के कुलपति रणजीत सिंह की तबीयत बिगड़ने पर भी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच सकी थी। उनके साथ यात्रा कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े दो छात्रों द्वारा उन्हें अस्पताल ले जाने हाई कोर्ट जज की गाड़ी छीनकर उन्हें अस्पताल ले जाने के बाद मामले काफी तूल पकड़ा था। तब भी छात्रों का कहना था कि एंबुलेंस नहीं आई थी, इस कारण उन्हें कुलपति की जान बचाने के लिए हाई कोर्ट जज की गाड़ी छीनना पड़ी थी। कुलपति की भी अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी।
जानकारी के मुताबिक, मामा का बाजार माधौगंज निवासी अमन कपूर (35 वर्ष) और उनकी मां मीना कपूर का ट्रेन क्रमांक 22195 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस के थर्ड एसी कोच बी-8 कोच में बर्थ नंबर पांच और आठ पर आरक्षण था। ट्रेन शाम को 28 मिनट की देरी से 6:58 बजे प्लेटफार्म क्रमांक दो पर पहुंची। ट्रेन के रुकने पर अमन अपनी मां के साथ जैसे ही कोच में चढ़ा, वैसे ही उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गया। अमन के बेहोश होते ही मां मीना ने साथी यात्रियों और रेलवे के स्टाफ से मदद मांगी। अन्य यात्रियों और रेलवे के स्टाफ ने अमन को ट्रेन से उतारकर प्लेटफार्म पर लाए।
रेलवे के स्टाफ ने तत्काल ही इसकी सूचना 108 एंबुलेंस को दी। उधर मीना कपूर ने अपने पति राज कपूर को इसकी जानकारी दी। राज कपूर मामा का बाजार स्थित निवास से जब तक स्टेशन पहुंचे, तब तक एंबुलेंस वहां नहीं आई थी। रेलवे के अधिकारी भी एंबुलेंस के इंतजार में बैठे रहे। एंबुलेंस नहीं आने पर तत्काल ही निजी टैक्सी कर अमन को जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर पहुंचाया गया, जहां डाक्टरों ने अमन को मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों के अनुसार प्राथमिक तौर पर यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है। लापरवाही की इंतहा यह है कि नोडल अधिकारी एंबुलेंस इंद्रपाल निवारिया का कहना है कि एंबुलेंस बुलाने को लेकर कोई सूचना ही नहीं मिली थी।
झांसी-बांद्रा एक्स. के एसी कोच में सवार हो रहा युवक अचानक बेहोश हो गया था। उसे ट्रेन से उतारकर एंबुलेंस को सूचना दी गई थी, लेकिन काफी इंतजार के बाद एंबुलेंस नहीं आई। इस बीच युवक के स्वजन आ गए और वे उसे निजी वाहन से लेकर चले गए।
-लालाराम सोलंकी, स्टेशन निदेशक ग्वालियर
हमें कोई सूचना नहीं मिली स्टेशन पर युवक के बेहोश होने की हमारे पास कोई सूचना नहीं आई है। यदि सूचना आती, तो एंबुलेंस तुरंत ही स्टेशन पहुंच जाती।
-इंद्रपाल निवारिया, नोडल अधिकारी 108 एंबुलेंस।