
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: कहीं पानी जैसी सब्जी तो कहीं सूप जैसी तुअर की दाल और कहीं हलुए जैसी। कच्ची पूड़ी तो गुणवत्ताहीन दलिया-खिचड़ी। स्कूल-आंगनबाड़ियों के मध्याह्न भोजन में परोसे जाने वाले इस तरह के व्यंजनों के स्वाद का अंदाजा तो सहज ही लगाया जा सकता है।
यह हकीकत गुरुवार को नईदुनिया टीम द्वारा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में की गई पड़ताल में सामने आई। आलम यह था कि कई जगह भोजन शाम तक वैसा ही रखा हुआ था जैसा आया था। स्टाफ का कहना था कि यह रोज की ही स्थिति है। हालात यह हैं कि बेस्वाद भोजन को बच्चे खाना ही नहीं चाहते, रोज फेंकना पड़़ता है। प्रक्रिया को लेकर पूरा सिस्टम है, लेकिन निगरानी के अभाव में मध्याह्न भोजन में न स्वाद है और न पौष्टिकता। जिम्मेदार अफसरों और जनप्रतिनिधियों की की उदासीनता ने नौनिहालों के निवाले को भ्रष्टाचार के हवाले कर रखा है।
नईदुनिया टीम ने शहर के बीचों बीच ज्येंद्रगंज स्थित शासकीय कन्या उमा विद्यालय में पड़ताल की, यहां आंगनबाड़ी का भोजन किचिन में रखा था। कच्ची पूड़ी और अज्ञात पेस्ट कोई दाल होने की संभावना जता रहा था। इसी तरह कुछ आंगनबाड़ियों में आलू बिना छिले एक तरफ दिखे। देखकर लग रहा था कि किसी ने सिर्फ पानी डाल दिया है।
महिला एवं बाल विकास का स्टाफ हो या आशा-एएनएम इनकी ओर से कुपोषित बच्चों को ट्रैक ही नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि थाटीपुर स्थित एनआरसी में बच्चों की संख्या सात ही है जबकि यहां 20 पलंग की व्यवस्था है। यहां के प्रभारी डॉ. आशुतोष शर्मा हैं।
1- शासकीय कन्या उमा विद्यालय में स्कूल के स्टाफ द्वारा भोजन की क्वालिटी का सैंपल दिखाया गया। यहां एक महिला कर्मचारी ने बताया कि पूड़ी कच्ची सी आती है तो बच्चे कुछ खाते नहीं है। इसके अलावा तुअर की दाल देखने मे पेस्ट जैसी थी जिसमें दाल के दाने नहीं थे। आलू की सब्जी थोड़ी औसत स्तर की थी।
2- शासकीय कन्या विद्यालय में ही आंगनबाड़ी केंद्र में बाल्टियों में खाना रखा हुआ था, खिचड़ी और दलिया यहां मिला, दलिया खराब क्वालिटी का दिखा। दोपहर तक खाना रखा हुआ था यानि बच्चों ने खाना खाया नहीं था।
3- बहोड़ापुर क्षेत्र-पुलिस लाइन के आसपास की आंगनबाड़ियों में आलू की सब्जी की क्वालिटी ठीक नहीं थी।
मध्याह्न भोजन की निगरानी के लिए तीन क्वालिटी इंस्पेक्टर्स हैं इसके अलावा शिक्षा विभाग के अलग अलग अधिकारियों के माध्यम से निगरानी कराई जाती है। स्कूल में एक नोडल अधिकारी होता है जो सैंपल भी लेता है।
सोजान सिंह रावत, सीईओ, जिला पंचायत ग्वालियर
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