
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शीतला माता मंदिर परिसर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर की जाने वाली व्यवस्थाओं में इस बार लापरवाही सामने आई है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि हर साल नवरात्र के दौरान परिसर में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती थी, लेकिन इस बार डाक्टरों की तैनाती नहीं की गई। इतना ही नहीं, परिसर में आपात स्थिति के लिए खड़ी रहने वाली एंबुलेंस भी इस बार मौजूद नहीं थी।
हादसे के बाद घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए न तो मौके पर चिकित्सक मौजूद थे और न ही एंबुलेंस की सुविधा मिल सकी। ऐसे में घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इस स्थिति ने नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु शीतला माता मंदिर पहुंचते हैं। भीड़भाड़ के बीच किसी भी अप्रिय घटना, चोट या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में मौके पर प्राथमिक उपचार और तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। इसके बावजूद इस बार चिकित्सकों की ड्यूटी और एंबुलेंस की उपलब्धता नहीं होने से व्यवस्था की कमी उजागर हुई।
सवाल यह है कि जब हर साल नवरात्र के दौरान चिकित्सकों की तैनाती और एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती थी, तो इस बार इन्हें क्यों नहीं रखा गया। क्या आयोजन से पहले स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासन के बीच समन्वय नहीं हुआ, या फिर आपात चिकित्सा इंतजामों को जरूरी नहीं समझा गया। हादसे के बाद इन सवालों के जवाब और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
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