
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर में आगामी दिनों में वेस्ट जोन रीजनल ज्यूडिशियरी कांफ्रेंस होने जा रही है। न्यायिक शिक्षा के बढ़ते आयाम विषय पर इसका आयोजन 26 से 27 सितंबर तक विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के नवीन परिसर स्थित दंतोपंत्त ठेंगड़ी सभागार में किया जाएगा।
कांफ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के न्यायमूर्तिगण सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल होंगे। वहीं भारत के मुख्य न्यायाधीश भी इस आयोजन में शामिल हो सकते हैं।
इसमें सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के 60 से ज्यादा न्यायामूर्तिगण व जिला न्यायालयों के बड़ी संख्या में न्यायाधीश शामिल होंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन के चलते जिला प्रशासन व पुलिस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शहर के प्रमुख होटलों में कमरों का आरक्षण किया जा रहा है। साथ ही एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी।
इससे पहले इंदौर में हुआ था सम्मेलन
बता दें कि, इससे पहले इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। यह कार्यक्रम नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की देखरेख में और मध्य प्रदेश स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा आयोजित किया गया था।
सीजेआई ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। अब ग्वालियर में रीजनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था व लाइजनिंग को लेकर तैयारियां की जा रहीं हैं, बड़ी संख्या में अधिकारियों की डयूटी इसमें लगाई जा रही है।
यह है प्रस्तावित शेडयूल...
26 सितंबर 2026 सत्र एक समय
दोपहर 12 बजे से एक बजे तक
विषय: न्यायिक शिक्षा की आवश्यकताएं।
उभरती पद्धतियां, गुणवत्ता मानक और संस्थागत उत्कृष्टता।
बदलती कानूनी और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप न्यायिक शिक्षा का विकास।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक शिक्षा मॉडलों का तुलनात्मक विश्लेषण।
न्यायिक शिक्षा ऑडिट
संस्थागत शक्तियों, चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं की पहचान करना।
न्यायिक प्रशिक्षण के लिए मापने योग्य प्रदर्शन संकेतक और गुणवत्ता मानक विकसित करना।
सत्र दो समय: दोपहर एक बजे से 2:30 बजे तक।
न्यायिक शिक्षा में नवाचार।
साझाकरण के माध्यम से सीखना।
चर्चा का प्रस्तावित दायरा
व्यस्क शिक्षा के सिद्धांत और योग्यता-आधारित न्यायिक शिक्षा।
केस स्टडी (मामलों के अध्ययन), न्यायिक अनुकरण (सिमुलेशन) और भूमिका निर्वहन (रोल प्ले) अभ्यासों के माध्यम से व्यावहारिक सीख।
न्यायिक निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए समस्या-आधारित और परिदृश्य-संचालित शिक्षण।
संवादात्मक (इंटरैक्टिव) और प्रतिभागी-केंद्रित न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तैयार करना।
सत्र तीन समय: दोपहर 3:30 बजे से शाम पांच बजे तक।
विषय: संकाय उत्कृष्टता को सुदृढ़ करना।
नेतृत्व, पाठ्यक्रम नवाचार और भविष्य के लिए तैयार न्यायिक अकादमियां।
चर्चा का प्रस्तावित दायरा:
ट्रेन-द-ट्रेनर (प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण) कार्यक्रमों के माध्यम से अत्यधिक सक्षम न्यायिक संकाय (फैकल्टी) का एक कैडर तैयार करना।
समकालीन कानूनी विकास और न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम में नवाचार।
न्यायिक शिक्षा में अंतःविषय (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को शामिल करना।
परिणाम-आधारित मूल्यांकन और निरंतर फीडबैक तंत्र के माध्यम से प्रशिक्षण की प्रभावशीलता की निगरानी करना।
27 सितंबर 2026 सत्र चार समय: सुबह 10 से 11:30 बजे तक।
विषय: न्यायिक शिक्षा का डिजिटल परिवर्तन
अवसर, चुनौतियां और आगे की राह।
चर्चा का प्रस्तावित दायरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता और न्यायिक निर्णय लेने पर इसके प्रभाव।
साइबर कानून, डिजिटल साक्ष्य, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों में न्यायिक दक्षता।
प्रौद्योगिकी में हालिया प्रगति और इसके संभावित उपयोग के मामले।
जेनरेटिव एआई समर्थित शिक्षण उपकरणों के माध्यम से न्यायिक शिक्षा को बदलना।
भौतिक (फिजिकल), आभासी (वर्चुअल) और स्व-गतिशील (सेल्फ-पेस्ड) शिक्षा को मिलाने वाले ब्लेंडेड लर्निंग माडल।
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सत्र पांच समय: दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक।
विषय: उत्तरदायी और समावेशी न्याय के लिए न्यायिक दक्षताओं का निर्माण।
चर्चा का प्रस्तावित दायरा: सामाजिक संदर्भ में न्यायनिर्णयन
समावेशी और न्यायसंगत न्याय को बढ़ावा देना।
न्याय करने में निष्पक्षता और तटस्थता।
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए न्यायिक क्षमता को बढ़ाना।
न्यायिक नैतिकता, सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक जिम्मेदारी को मजबूत करना।
आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), न्यायिक तर्क और निर्णय लेने के कौशल का विकास करना।
फीडबैक और ऑडिट: दोपहर 1:30 से 1:40 बजे तक (प्रतिभागियों द्वारा पाठ्यक्रम का फीडबैक और ऑडिट)।
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