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नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर की सड़कों की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई है।
सड़क से संबंधित मूल सरकारी अभिलेख उपयंत्री के घर पर मिलने के मामले में कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी ग्वालियर जोन के मुख्य अभियंता वीके अरख और प्रभारी उपयंत्री दीपक गुप्ता को अवमानना नोटिस जारी किया है।
दोनों को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य अभियंता द्वारा प्रभारी कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को जारी कारण बताओ नोटिस के प्रभाव और क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को अवमानना प्रकरणों के साथ होगी।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने 30 अक्टूबर को कैलाश चंद अग्रवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। मुख्य अभियंता वीके अरख ने अपने शपथपत्र में बताया था कि मूल फाइल घर पर रखने के कारण प्रभारी उपयंत्री दीपक गुप्ता को निलंबित किया गया है।
साथ ही कार्यालय प्रमुख होने के बावजूद अभिलेख सुरक्षित नहीं रखने के आधार पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
मुख्य अभियंता की भूमिका पर उठाए सवाल
सुनवाई में उपयंत्री दीपक गुप्ता के जवाब का उल्लेख हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि हाई कोर्ट में पेश किए जाने वाले जवाब के लिए संबंधित सरकारी अधिवक्ता ने आपत्ति तैयार की थी और अभिलेख उनके घर पर रखे गए थे।
इस दौरान वे अपरिहार्य परिस्थितियों में रात में ग्वालियर से भोपाल चले गए थे। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी की ओर से पेश आपत्ति और उसके साथ लगे मुख्य अभियंता के शपथपत्र का परीक्षण किया। खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि आपत्ति तैयार करने में मूल रिकार्ड का इस्तेमाल हुआ था, इसलिए वह मुख्य अभियंता वीके अरख की अभिरक्षा में रहा होगा।
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ऐसे में अभिलेख को सुरक्षित वापस कार्यालय पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उनकी थी। कोर्ट ने आशंका जताई कि उपयंत्री को मूल फाइल घर पर रखने के लिए मुख्य अभियंता ने ही प्रेरित किया हो, ऐसा हो सकता है।
खंडपीठ ने कार्यपालन यंत्री को जारी कारण बताओ नोटिस को प्रथम दृष्टया निरर्थक बताते हुए इसे न्यायालयीन कार्रवाई में हस्तक्षेप और मुख्य अभियंता की अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास माना। इसी आधार पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ अलग से अवमानना प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य अभियंता के पद पर बने रहने पर भी मांगा जवाब
कोर्ट ने मुख्य अभियंता से यह भी पूछा है कि उनके कारण बताओ नोटिस को निरस्त क्यों न किया जाए और याचिका लंबित रहने तक उन्हें मुख्य अभियंता के दायित्वों के निर्वहन से क्यों न रोका जाए? राज्य सरकार को उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी को जिम्मेदारी देने का निर्देश क्यों न दिया जाए? इस पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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