स्वर्ण रेखा नदी में कचरा मिलने पर HC सख्त, नगर निगम पर उठाए सवाल; नगर आयुक्त से मांगी तस्वीरें
हाई कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
Publish Date: Fri, 30 Oct 2026 01:00:44 AM (IST)Updated Date: Fri, 30 Oct 2026 01:00:44 AM (IST)
स्वर्ण रेखा नदी में कचरे को लेकर HC सख्त, फाइल फोटोHighLights
- स्वर्ण रेखा नदी में कचरे को लेकर HC सख्त
- नदी में निर्माण तोड़ने पर भी उठे सवाल..
- 1000 रुपए जुर्माने के वादे पर मांगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। स्वर्ण रेखा नदी में कचरा फेंकने वालों पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाने के वादे के बावजूद नदी में गंदगी मिलने पर हाई कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे नदी के पूरे क्षेत्र की ताजा तस्वीरें लेकर प्रस्तुत करें।
तस्वीरों से यह पता लगाया जाएगा कि नदी में सीवेज के अलावा अन्य कचरा भी पड़ा है या नहीं। यदि कचरा मिलता है तो आयुक्त को यह भी बताना होगा कि कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने स्वर्ण रेखा नदी और प्राकृतिक जल संरचनाओं को संरक्षित करने से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।
हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से यह भी पूछा है कि कचरा फेंकने पर जुर्माना लगाने के लिए कौन-सा वैधानिक प्रविधान लागू होता है और कानून के अनुसार कितना जुर्माना लगाया जा सकता है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पहले जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया था तो कार्रवाई में आई कठिनाइयों का भी विवरण देना होगा। गौरतलब है कि 18 फरवरी 2025 को नगर निगम के अधिकारियों ने कोर्ट में कहा था कि नदी में कचरा फेंकने पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
अब नदी में कचरा मिलने की स्थिति में निगम को अपने वादे पर अमल का हिसाब देना होगा।
नदी में सीमेंट हटाने और निर्माण तोड़ने पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नदी के मूल स्वरूप को बहाल करने और प्राकृतिक भूमिगत जलधाराओं पर हुए निर्माण हटाने की मांगों पर भी कई सवाल तय किए। कोर्ट ने पूछा कि जब सरकारी एजेंसियां स्वर्ण रेखा नदी में सीमेंट का काम कर रही थीं, तब इसका विरोध क्यों नहीं हुआ और अब सीमेंट हटाने का आदेश किस कानूनी प्रावधान के तहत दिया जा सकता है।
प्राकृतिक जलधाराओं पर बने निर्माणों को हटाने के मामले में भी कोर्ट ने कहा कि संबंधित निर्माण मालिकों को सुने बिना और आवश्यक अनुमतियों पर विचार किए बिना उन्हें तोड़ने का आदेश दिया जा सकता है या नहीं, इस पर विचार करना होगा।
याचिकाकर्ता ने वर्षा जल को स्वर्ण रेखा नदी में जाने से रोककर सिंधी कॉलोनी से गुजरने वाली पुरानी नहर की ओर मोड़ने की मांग भी की है। कोर्ट ने इस मांग पर अपने अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाया। साथ ही याचिकाकर्ता से नदी के पुनरुद्धार में अपने योगदान और जनजागरूकता के प्रयासों को स्पष्ट करने को कहा।