
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भिंड जिले के आलमपुर थाना क्षेत्र से लापता 19 वर्षीय युवती के मामले में हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति को अपनी जिंदगी के संबंध में स्वयं निर्णय लेने का अधिकार है। युवती ने कोर्ट में पेश होकर बताया कि उसने रोहित माहौर से शादी कर ली है और वह गुजरात में पति के साथ रह रही है। उसने माता-पिता के साथ रहने से भी इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को संजय कुमार बनाम मध्यप्रदेश शासन व अन्य मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने 19 वर्षीय बेटी के लापता होने का हवाला देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान आलमपुर थाने की महिला आरक्षक ने युवती को कोर्ट में पेश किया।
युवती ने कोर्ट को बताया कि वह रोहित माहौर की पत्नी है और उसके साथ गुजरात में रहना चाहती है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसे किसी ने अवैध रूप से बंधक नहीं बनाया है और वह अपने माता-पिता के पास नहीं जाना चाहती।
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कोर्ट ने युवती के बयान के बाद कहा कि वह बालिग है और उसे अपने जीवन के संबंध में निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। ऐसे में याचिका में अब कुछ शेष नहीं रह जाता। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद युवती की अभिरक्षा उसके पति को सौंपने के निर्देश दिए। साथ ही युवती को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता दी। इसके साथ ही याचिका का अंतिम रूप से निराकरण कर दिया गया।