
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जाली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनवाने के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इन पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन भोपाल और डबरा (ग्वालियर) के साइबर कैफे से किए गए थे। ऑनलाइन आवेदन के लिए जनरेट आईडी का आईपी एड्रेस ट्रेस करते हुए स्पेशल टास्क फोर्स की टीम के राडार पर दो साइबर कैफे आ गए हैं। इन दोनों के संचालकों से पूछताछ होगी।
भोपाल का साइबर कैफे संचालक एसटीएफ ने राउंड अप कर लिया है। उससे पूछताछ चल रही है। भोपाल में यह साइबर कैफे गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत अन्नानगर में ही है। यह बौद्ध मठ से करीब 500 मीटर दूर है। वहीं डबरा में बौद्ध विहार व आंबेडकर पार्क से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर बने साइबर कैफे से पासपोर्ट के लिए आवेदन हुए।
एसटीएफ इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट का सरगना रियाल चौधरी दोनों साइबर कैफे के संचालकों का बेहद करीबी माना जा रहा है। वह घंटों इन कैफे में बैठकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए आवेदनों को अपलोड करता था। वह काफी देर तक इंटरनेट चलाता था। इस दौरान अलग-अलग वेबसाइट भी यहीं से खोलता था। आरोपित खुद को अनपढ़ बताता था, जबकि सामने आया है कि वह घंटों इन साइबर कैफे में बैठकर इंटरनेट पर तमाम वेबसाइट खोलता था। इसमें हिंदी, अंग्रेजी वेबसाइट शामिल हैं।
ग्वालियर के डबरा स्थित कैफे से 17 और भोपाल के गोविंदपुरा से 40 पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन हुए। रियाल ने पूछताछ में यह खुलासा किया कि ग्वालियर और भोपाल से जिन 57 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बने, उनके जाली दस्तावेज बनवाने के लिए आवेदन यहीं से किए थे। फिर विभागों में सांठगांठ कर हिंदू नामों से दस्तावेज तैयार करा लिए।
उस समय ग्राम पंचायत से लेकर नगर निगम के जो दस्तावेज चाहिए थे, वह सभी विभाग में काम करने वाले कर्मचारियों की सांठगांठ से बनवा लिए। इसके अलावा, दसवीं की अंकसूची फर्जी हैं। इन लोगों ने कभी परीक्षा नहीं दी। अंकसूची बनवाने में इन कैफे संचालकों की भूमिका की जांच की जा रही है।
गृह विभाग द्वारा समय-समय पर पासपोर्ट के लिए पुलिस सत्यापन से जुड़े सर्कुलर जारी किए गए हैं। 14 जनवरी 2002 में एक सर्कुलर जारी हुआ था, जिसके मुताबिक पुलिस सत्यापन बहुत ही अहम प्रक्रिया है। इसके लिए जिला विशेष शाखा के डीएसपी को जिम्मेदारी दी गई है। अगर वह नहीं है तो पुलिस अधीक्षक द्वारा किसी राजपत्रित अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाती है।
थाना स्तर पर थाना प्रभारी बीट प्रभारी को भौतिक सत्यापन के लिए लिखते हैं। बीट प्रभारी प्रधान आरक्षक या उससे ऊपर रैंक का पुलिसकर्मी होता है। उसकी रिपोर्ट पर थाना प्रभारी आगे रिपोर्ट फॉरवर्ड करता है। सर्कुलर में स्पष्ट उल्लेख है कि कई लोगों का प्रतिकूल रिकॉर्ड होने के बाद भी रिपोर्ट सही हुई, जिससे पासपोर्ट बन जाते हैं। इसे लेकर सावधानी बरतने के निर्देश दिए थे। फिर भी इस नियम को दरकिनार किया गया।
यह भी पढ़ें- सड़क पर बहाया सैंकड़ों लीटर दूध, डेयरियां रहीं बंद... एमपी में विक्रेताओं का दाम बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू
साइबर कैफे संचालक राडार पर हैं। ग्वालियर और भोपाल के साइबर कैफे से 57 पासपोर्ट के लिए आवेदन हुए हैं। आईपी एड्रेस से ये दोनों चिन्हित किए गए हैं। - राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ