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ग्वालियर की सड़कों पर छलक रही है शराब...सरकार ने 'अड्डे' किए बंद, लोगों ने सड़क और सीढ़ियों को बनाया बार

शराब दुकानों से आहते तो बंद हो गए लेकिन शराबखोरी बंद नहीं हुई। उल्टा, शराबियों ने अब दुकानों के बाहर की सड़क, फुटपाथ और सीढ़ियों को ही अपने आहते बना ल...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 08:49:40 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 09:16:51 AM (IST)
ग्वालियर की सड़कों पर छलक रही है शराब...सरकार ने 'अड्डे' किए बंद, लोगों ने सड़क और सीढ़ियों को बनाया बार
ग्वालियर में खुलेआम हो रही शराबखोरी, नईदुनिया

HighLights

  1. ग्वालियर की सड़कों पर खुलेआम शराबखोरी
  2. प्रदेश सरकार ने बंद किए शहर में अहाते
  3. लोगों ने सड़क और सीढ़ियों को बनाया बार

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शराब दुकानों से आहते तो बंद हो गए लेकिन शराबखोरी बंद नहीं हुई। उल्टा, शराबियों ने अब दुकानों के बाहर की सड़क, फुटपाथ और सीढ़ियों को ही अपने आहते बना लिए हैं। हाथों में शराब की बोतल और डिस्पोजल ग्लास लिए लोग दिन के उजाले से लेकर देर रात तक खुलेआम जाम छलकाते नजर आ रहे हैं।

इससे राहगीरों, खासकर महिलाओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही सड़क किनारे होने वाली शराबखोरी से यातायात बाधित होने और हादसों का खतरा भी बढ़ रहा है।

नईदुनिया टीम ने शनिवार को शहर की शराब दुकानों के आसपास की स्थिति की पड़ताल की तो नई आबकारी नीति की जमीनी हकीकत सामने आई।

जिन आहतों को बंद कर शराब दुकानों के आसपास होने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई थी, वहां अब दुकान के बाहर ही खुलेआम शराबखोरी हो रही है। सवाल यह है कि आहते बंद होने के बाद शराब पीने वालों के लिए सड़क आखिर किसने खोल दी।


महाराज बाड़ा पर दिन में ही शराब पीते है लोग

नईदुनिया टीम महाराज बाड़ा पहुंची तो गोरखी के सामने स्थित शराब दुकान के आसपास कई लोग खड़े मिले। कुछ लोगों के हाथों में डिस्पोजल ग्लास थे और वे खुलेआम शराब पी रहे थे। दुकान के आसपास ही शराबखोरी चल रही थी।

यह इलाका शहर के प्रमुख और व्यस्त क्षेत्रों में शामिल है। यहां से दिनभर महिलाओं और परिवारों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद खुलेआम शराब पीने वालों को रोकने-टोकने वाला कोई नजर नहीं आया। राहगीर आते-जाते रहे और सड़क किनारे जाम छलकते रहे।

लक्ष्मणपुरा में सीढ़ियां बनीं शराबखोरी का ठिकाना

इसके बाद टीम लक्ष्मणपुरा स्थित शराब दुकान के पास पहुंची। यहां स्थिति भी अलग नहीं थी। दुकान के आसपास बनी सीढ़ियों पर लोग बैठकर शराब पी रहे थे। यह सब दुकान के काउंटर के बिल्कुल पास चल रहा था।

लोग आराम से बैठकर शराबखोरी करते रहे, लेकिन किसी जिम्मेदार विभाग की ओर से उन्हें रोकने की कोशिश नजर नहीं आई। सवाल यह है कि यदि दुकान के बाहर इस तरह खुलेआम शराब पीना जारी रहेगा तो आहते बंद करने का उद्देश्य आखिर कितना सफल हुआ।

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नीति बदली, लेकिन जमीन पर तस्वीर नहीं

मध्य प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों से जुड़े आहते बंद करने का फैसला किया था। पहले इन आहतों में लोग बैठकर शराब पीते और भोजन अथवा चखना लेते थे। नीति का उद्देश्य शराब दुकानों के आसपास खुले तौर पर होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करना था।

आहता गया, शराबखोरी सड़क पर आ गई

नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि आहते बंद होने के बावजूद शराब पीने वाले लोगों की गतिविधियां दुकान के आसपास ही जारी हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले शराबखोरी चारदीवारी के भीतर होती थी, अब सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर हो रही है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी आम राहगीरों को हो रही है।

व्यस्त बाजारों और आबादी वाले इलाकों में खुलेआम शराबखोरी का नजारा न केवल सामाजिक असहजता पैदा कर रहा है, बल्कि यातायात और कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है।

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