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मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता को कोर्ट ने दी 19 हफ्ते के गर्भ को गिराने की मंजूरी, भिंड का है मामला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 30 वर्षीय मूक-बधिर विधवा दुष्कर्म पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दे दी है।

By Harsh ShrivastavaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Fri, 10 Apr 2026 10:36:23 PM (IST)Updated Date: Fri, 10 Apr 2026 11:27:35 PM (IST)
मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता को कोर्ट ने दी 19 हफ्ते के गर्भ को गिराने की मंजूरी, भिंड का है मामला
यौन शोषण की शिकार विधवा पीड़िता को बड़ी राहत।

HighLights

  1. यौन शोषण की शिकार विधवा पीड़िता को बड़ी राहत
  2. मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता को मिली गर्भपात की अनुमति
  3. जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा- गरिमा सर्वोपरि

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 30 वर्षीय मूक-बधिर विधवा दुष्कर्म पीड़िता को बड़ी राहत देते हुए गर्भपात की अनुमति दे दी है। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा कि पीड़िता की गरिमा, मानसिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए यह जरूरी है। पीड़िता की ओर से अधिवक्ता विकास समाधिया ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र नायक उपस्थित रहे।

यौन शोषण के बाद गर्भवती हुई थी पीड़िता

याचिका में बताया गया कि पीड़िता भिंड जिले के गांव खानेटा में ससुराल में रह रही थी। उसके पति की चार साल पहले मौत हो चुकी है। उसका भाई उसकी देखभाल करता है। 11 मार्च को भाई जब मिलने पहुंचा तो सास मिथलेश, ससुर अजब सिंह और देवर गोदान व करू उसे पीटते मिले। बाद में गोहद अस्पताल में जांच में पता चला कि वह करीब 19 सप्ताह पांच दिन की गर्भवती है। आरोप है कि यह गर्भ यौन शोषण का नतीजा है।


यह भी पढ़ें- प्रेम विवाह करने वाले जोड़े को हाई कोर्ट से राहत, ग्वालियर खंडपीठ का आदेश- जान का खतरा है, तो पुलिस तुरंत दे सुरक्षा

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और कोर्ट का आदेश

कोर्ट के आदेश पर कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर के मेडिकल बोर्ड ने जांच की। बोर्ड में डॉक्टर पुनीत रस्तोगी, डॉ. वृंदा जोशी, डॉ. अजय गौर, डॉ. मेधा मिश्रा, डॉ. अंजनी जलज, डॉ. सुधा अयंगर और डॉ. संजय धवाले शामिल रहे। रिपोर्ट में गर्भपात को सुरक्षित बताया गया।

इसके बाद हाई कोर्ट ने 11 अप्रैल सुबह 10 बजे जीआर मेडिकल कॉलेज के डीन को वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम बनाकर गर्भपात कराने के आदेश दिए। साथ ही भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने, पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने और पूरी प्रक्रिया मुफ्त कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।