
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा से जुड़े कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यहां छात्रों की जगह विभाग के चपरासी और कंप्यूटर ऑपरेटर ही मार्कशीट और पुस्तकालय की किताबें इश्यू करवा रहे हैं। इतना ही नहीं छात्रों की प्रायोगिक परीक्षाओं में भी इस कदर मदद की जा रही है कि उनको परीक्षा में पेंटिंग बनाने की जगह पिछले वर्ष की पेंटिंग जमा करवाकर अच्छे अंक दे दिए जाते हैं।
ऐसा बिना वजह के नहीं हो रहा है; आरोप है कि इसके लिए छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती है। इसके एवज में उन्हें यह सुविधाएं दी जा रही हैं कि उन्हें न किताबें और मार्कशीट के लिए आना पड़ता है और न परीक्षाओं की चिंता होती है।
जानकारी के अनुसार, बाहरी राज्यों जैसे राजस्थान, दिल्ली, गुजरात के कई छात्र, जो विश्वविद्यालय से दूरस्थ शिक्षा के तहत ड्राइंग और पेंटिंग से एमए कर रहे हैं, उन्हें निशाना बनाकर पूरा खेल चलाया जाता है। आरोप है कि विभाग का कंप्यूटर ऑपरेटर विभाग के चपरासियों से सांठगांठ करके पहले छात्रों से संपर्क करवाता है, फिर उन्हें पहले लालच देने का प्रयास किया जाता है, नहीं मानते हैं तो धमकाया जाता है। फेल करने की धमकी के बाद डरकर छात्र उनकी शर्तें मान लेता है। आरोप यह भी है कि प्रति छात्र लगभग 30 हजार रुपये की वसूली की जाती है। इसके बाद छात्र को सभी सुविधाएं भी दी जाती हैं।
विभाग में पढ़ने वाले छात्रों की मार्कशीट और उनकी पुस्तकालय की किताबों में भी उन्हें सुविधा दी जाती है। कुछ रिकार्ड में कंप्यूटर ऑपरेटर सतीश शर्मा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संतोष और विभाग के पूर्व चपरासी सुरेश (इसी मामले में पकड़े जाने पर ट्रांसफर हुआ) के साइन हैं, जिसमें उन्होंने छात्रों की मार्कशीट खुद लेकर अपने माध्यम से भेजी हैं।
सत्र 23-25 में 67 विद्यार्थी जिन्होंने एमए ड्राइंग एंड पेंटिंग के अंतिम वर्ष की प्रायोगिक परीक्षा दी है, वहीं सत्र 21-23 में 37 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। जिनकी जमा पेंटिंग शीट कुल मिलाकर 104 होनी चाहिए, लेकिन विभाग में सिवाय कबाड़े के कुछ नहीं मिला। 100 पेंटिंग होना तो दूर की बात संग्रहण वाले कमरे में 10 शीट भी नहीं दिखीं।
इनकी मार्कशीट प्राप्त की:
विद्यार्थी कीर्ति - प्राप्तकर्ता संतोष (चपरासी)
विद्यार्थी सुरेंद्र - प्राप्तकर्ता सतीश (कंप्यूटर आपरेटर)
विद्यार्थी निकिता सिंह - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
विद्यार्थी उत्कर्ष - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
विद्यार्थी विनोद - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
पुस्तकें भी इनके ही नाम पर
विद्यार्थी अंजू भदौरिया - प्राप्तकर्ता सतीश (कंप्यूटर आपरेटर)
विद्यार्थी संजय कुमार - प्राप्तकर्ता सतीश (कंप्यूटर आपरेटर)
विद्यार्थी पवन कुमार - प्राप्तकर्ता सतीश (कंप्यूटर आपरेटर)
विद्यार्थी अंजू आनंद - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
विद्यार्थी सलीम राजा - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
विद्यार्थी विक्रम कुमार - प्राप्तकर्ता सुरेश (पूर्व विभागीय चपरासी)
इस मामले में लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। इसकी तत्काल प्रभाव में जांच करवा रहे हैं। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. एसएन महापात्रा, निदेशक, दूरस्थ शिक्षण संस्थान।