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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मां मेरा क्या कसूर था जो ट्रेन में इस तरह कलेजे के टुकड़े को छोड़ा

डेढ़ साल की मासूम 480 किमी का सफर अकेले तय कर ग्वालियर स्टेशन पर पहुंची। जहां पर आरपीएफ ने उसे चाइल्ड लाइन के सुपुर्द करदिया।

By anil.tomarEdited By: anil.tomar
Publish Date: Tue, 23 Nov 2021 09:55:16 PM (IST)Updated Date: Wed, 24 Nov 2021 04:02:47 PM (IST)
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मां मेरा क्या कसूर था जो ट्रेन में इस तरह कलेजे के टुकड़े को छोड़ा

मां ने छोड़ा ट्रेन में तो डेढ़ साल की मासूम कोख, 480 किमी का सफर अकेले किया तय

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि।ट्रेन नंबर 12617 के कोच नंबर 8 में मिली डेढ़ साल की मासूम की नजरों को देखने से ऐसा ही लग रहा है कि वह अपनी मां से पूछना चाह रही थी कि आखिर उसने ट्रेन में अपने कलेजे के टुकड़े को क्यों छोड़ा। इन सवालों का जवाब बच्ची तो जानना चाह ही रही है, वहीं अारपीएफ व जीआरपी भी जानना चाह रही है। जीआरपी व आरपीएफ की टीमें इटारसी में उस महिला को तलाश रही हैं जिसने बच्ची को ट्रेन में छोड़ा था।

उल्‍लेखनीय है कि डेढ़ साल की मासूम 480 किमी का सफर अकेले तय कर ग्वालियर स्टेशन पर पहुंची। जहां पर आरपीएफ ने उसे चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। बच्ची को उसकी मां इटारसी रेलवे स्टेशन पर कोच में छोड़कर उतर गई थी। जिसके बाद बच्ची कोच की बर्थ पर 8 घंटे पड़ी रही। जब सह यात्रियों से इसकी जानकारी झांसी के रेलवे अधिकारियों को मिली। जहां से सूचना ग्वालियर आरपीएफ को दी गई। ग्वालियर आरपीएफ ने ट्रेन अटेंड कर बच्ची को ट्रेन से उतारकर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया।


आरपीफ निरीक्षक संजय आर्या ने बताया कि झांसी से सूचना मिली कि ट्रेन नंबर 12617 के काेच नंबर 8 की बर्थ 14 पर एक डेढ़ साल की अकेली बच्ची है। जिसे अटेंड कर उतार लिया जाए। सूचना मिलने पर आरपीएफ द्वारा चलाई जा रही मेरी सहेली अभियान में तैनात अन्नू एवं भावना मोदी के साथ आरपीएफ उपनिरीक्षक शैलेन्द्र सिंह ठाकुर, सहायक उपनिरीक्षक एसके शर्मा को ट्रेन अटेंडे करने के लिए पहुंचाया गया। जहां पर उस बच्ची को उतार लिया गया और बच्ची को अल्पअहार कराकर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया।

इस तरह किया 480 किमी का सफर तय

आरपीएफ को सह यात्रियों ने बताया कि बच्ची को बर्थ पर छोडकर महिला इटारसी स्टेशन पर उतर गई। ट्रेन जब चल दी तो इंतजार किया कि महिला ट्रेन के चलने पर शायद पीछे के किसी कोच में सवार हो गई होगी और आती होगी। इसी इंतजार में भोपाल स्टेशन गुजर गया। लेकिन जब बीना स्टेशन तक भी बच्ची की मां नहीं आई तो सभी काे चिंता हुई और टीटी को इसकी जानकारी दी गई। जिसके बाद जानकारी जब तक रेलवे अधिकारियों को झांसी में मिलती तबतक ट्रेन झांसी से ग्वालियर के लिए रवाना हो गई थी। झांसी से मिली जानकारी आरपीएफ ने ग्वालियर स्टेशन पर बच्ची को सकुशल उतार लिया।

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