
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे। राज्य सरकार और एम्स भोपाल ने मिलकर एक मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसके तहत नर्सिंग छात्रों को आधुनिक मशीनों के संचालन और गंभीर मरीजों की देखभाल में दक्ष बनाया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत एम्स भोपाल के विशेषज्ञ प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों को हाईटेक मेंटर के रूप में प्रशिक्षित करेंगे।
वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में पढ़ाई का ढांचा पारंपरिक है। छात्रों का अधिक समय थ्योरी पढ़ने और ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण में ही निकल जाता है। उन्हें बड़े अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों और जटिल मेडिकल केसों को नजदीक से देखने का अवसर बहुत कम मिलता है। व्यावहारिक अनुभव की यही कमी दूर करने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है।
मास्टर प्लान के पहले चरण में 24 जिलों के नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ‘एडवांस सिमुलेशन लैब’ के माध्यम से डमी (पुतलों) पर वेंटिलेटर, डायलिसिस मशीन और कार्डियक मॉनिटर जैसे उपकरणों का अभ्यास कराया गया। साथ ही कॉलेज प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं, जो अब तक केवल एम्स जैसे बड़े संस्थानों तक सीमित थीं।
इस नई पद्धति के जरिए भारतीय नर्सिंग परिषद के नए ‘दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम’ को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश की नर्सिंग शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाया जा सके।
इस पहल से छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही इमरजेंसी केयर में इस्तेमाल होने वाली मशीनें चलाना आ जाएगा। अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन करते समय उन्हें अलग से प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हाथों-हाथ प्रैक्टिस से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे मरीजों को बेहतर इलाज दे सकेंगे। साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग मिलने से उनके लिए देश के बड़े निजी अस्पतालों और विदेशों में नौकरी के अवसर भी खुलेंगे।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक डॉ माधवानंद कर ने कहा कि मप्र के नर्सिंग शिक्षकों और प्राचार्यों को नई तकनीकों और पाठ्यक्रमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।