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ग्वालियर में मानसून की शुरुआत धीमी तो क्या? किसानों के लिए वरदान साबित होगी बारिश, खरीफ की फसल करेगी मालामाल

जिले में मानसून की शुरुआत भले ही सुस्त और धीमी रही हो, लेकिन बीते दिनों हुई संतुलित और समयबद्ध वर्षा ने कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।

By Anil TomarEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Tue, 15 Sep 2026 10:46:00 AM (IST)Updated Date: Tue, 15 Sep 2026 11:20:59 AM (IST)
ग्वालियर में मानसून की शुरुआत धीमी तो क्या? किसानों के लिए वरदान साबित होगी बारिश, खरीफ की फसल करेगी मालामाल
खरीफ की फसल के लिए वरदान साबित होगी संतुलित बारिश, फाइल फोटो

HighLights

  1. किसानों के लिए वरदान साबित होगी बारिश
  2. संतुलित बारिश से बढ़ी उत्पादन की संभावना
  3. संभाग में धीमी, सुस्त हुई मानसून की शुरुआत

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिले में मानसून की शुरुआत भले ही सुस्त और धीमी रही हो, लेकिन बीते दिनों हुई संतुलित और समयबद्ध वर्षा ने कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार हुई वर्षा फसलों के लिए नपी-तुली और समय पर जरूरत के मुताबिक हुई है, जिससे ग्वालियर अंचल में खरीफ सीजन में अच्छे उत्पादन की पूरी संभावना बन गई है।

वर्षा से धान और तिलहन को फायदा

मानसून के शुरुआती दौर में कम वर्षा से किसान चिंतित थे, लेकिन अगस्त और सितंबर के शुरुआती हफ्तों में हुई वर्षा ने संकट को पूरी तरह टाल दिया। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह कुशवाह का कहना है कि फसलों की बढ़वार के अलग-अलग चरणों में पानी की जितनी आवश्यकता थी, ठीक उसी समय वर्षा हुई है।

ग्वालियर, डबरा और भितरवार बेल्ट में बड़े पैमाने पर की जाने वाली धान की फसल के लिए यह वर्षा संजीवनी बनकर आई है। खेतों में पर्याप्त नमी होने से पौधों का फुटाव और बालियां बनने की प्रक्रिया बेहतर ढंग से हो रही है। साथ ही अब न तो रोग लगेंगे और न ही कीट का प्रकोप होगा।


बाजरा, ज्वार, तिल, अरहर और तिल जैसी फसलों के लिए भी यह वर्षा काफी फायदेमंद रही है। जलभराव न होने और रुक-रुक कर धूप-छांव का मौसम रहने से पौधों की वृद्धि संतुलित रही है।

कीट और रोगों के प्रकोप में भारी कमी

सामान्यतः अत्यधिक जलभराव या लंबे समय तक सूखा रहने पर फसलों में फंगस, तना छेदक और अन्य कीटों का हमला बढ़ जाता है। हालांकि, इस बार संतुलित वर्षा और बीच-बीच में चली हवाओं के कारण फसलों पर बीमारियों का प्रकोप काफी कम देखा जा रहा है। इससे किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बचेगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।

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रबी सीजन के लिए भी शुभ संकेत

उप-संचालक भानु प्रकाश शर्मा का मानना है कि इस वर्षा का दोहरा फायदा जिले को मिलने जा रहा है। एक तरफ जहां खरीफ की पैदावार में उछाल आएगा, वहीं दूसरी तरफ कैचमेंट एरिया में जलभराव और भू-जल स्तर में सुधार होने से आगामी रबी सीजन गेहूं, सरसों व चना की बोवनी के लिए भी जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी।

कछौआ के किसान मुकेश पटेल के मुताबिक, यदि मौसम का यह अनुकूल मिजाज अगले कुछ हफ्तों तक ऐसे ही बना रहा, तो इस बार फसल का उत्पादन अच्छा होगा। बशर्ते पिछले साल जब धान की फसल कटने वाली थी तो अधिक वर्षा हुई थी, जिससे फसल खराब हुई थी। ऐसा आगामी समय में न हो।

कितने क्षेत्र में बोई गई कौन सी फसल...

फसल- क्षेत्र

धान- एक लाख हेक्टेयर

ज्वार - 21 हजार हेक्टेयर

मक्का- 200 हेक्टेयर

बाजरा- 15 हजार हेक्टेयर

अरहर- 100 हेक्टेयर

मूंग- दो हजार हेक्टेयर

तिल दो हजार हेक्टेयर

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