
अनूप भार्गव, नईदुनिया, ग्वालियर। रबी सीजन में खेतों में सिंचाई के लिए कृषि पंपों का लोड बढ़ने के साथ प्रदेश में बिजली की मांग नया रिकार्ड बना सकती है। इस बार अधिकतम मांग 21 हजार 300 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। यह जनवरी 2026 में दर्ज प्रदेश की अब तक की सर्वाधिक 19 हजार 895 मेगावाट मांग से करीब 1,400 मेगावाट अधिक होगी। संभावित बढ़े हुए लोड को देखते हुए बिजली उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन नेटवर्क तक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के साथ घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति बनाए रखना बिजली कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों की माइक्रो निगरानी की जा रही है।
पोस्ट मानसून मेंटेनेंस, ओवरलोडिंग रोकने के उपाय और फाल्ट होने की स्थिति में तत्काल बिजली बहाल करने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पिछले रबी सीजन में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के सात जिलों में अधिकतम बिजली लोड दो हजार 978 मेगावाट दर्ज किया गया था। इसमें ग्वालियर शहर का हिस्सा सबसे अधिक 801 मेगावाट रहा था। इस बार मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रमुख सबस्टेशनों और ट्रांसमिशन लाइनों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
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प्रदेश के तीनों विद्युत क्षेत्रों में पिछले अधिकतम लोड और वर्तमान स्थिति में बड़ा अंतर है। रबी में कृषि पंपों के संचालन के साथ इन क्षेत्रों में मांग तेजी से बढ़ने की संभावना है।
एमपी ट्रांसको के प्रबंध संचालक ने प्रदेश के फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभावित 21,300 मेगावाट मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जाएं। - शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी।