MP पराली जलाने में देश में नंबर-1, पंजाब-हरियाणा भी छूटे पीछे; किसानों पर लगेगा जुर्माना
ग्वालियर-चंबल अंचल में धान की रोपाई देर से होने के कारण अभी इक्का-दुक्का जगहों पर ही पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं। हालांकि, धान की कटाई शुरू होते ही ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 08:45:50 AM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 09:35:52 AM (IST)
MP पराली जलाने में देश में नंबर-1। (एआई जनरेटेड)HighLights
- धान कटाई शुरू होते ही पराली जलाने में मप्र सबसे आगे
- गुना जिला प्रदेश में पहले स्थान पर
- ग्वालियर-चंबल अंचल में अभी इक्का-दुक्का घटनाएं
अनिल तोमर, नईदुनिया ग्वालियर : प्रदेश में धान की कटाई शुरू होने के साथ ही किसानों ने अवशेष पराली जलाना शुरू कर दिया है। धान कटने के शुरुआती दौर में ही देश भर में मध्य प्रदेश के पहले स्थान पर पहुंचने से चिंता बढ़ गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की इकाई कंसोर्टियम फार रिसर्च एग्रोइकोसिस्टम मानीटरिंग सेटेलाइट से पराली जलाने पर नजर रखता है।
इसके अनुसार 15 सितंबर से 13 अक्टूबर तक प्रदेश में 340 जगहों पर पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि में प्रदेश में केवल 55 घटनाएं ही हुई थी। गुना में सबसे अधिक 45 घटनाएं हुई हैं। यह देश में तीसरे नंबर का जिला है।
खेतों को जल्द खाली करने के लिए पराली जलाने की आशंका
- मानसून इस बार ग्वालियर अंचल में देरी से सक्रिय हुआ था, इसलिए धान की रोपाई अगस्त में हुई, यहां अभी कटाई होना है परंतु गुना, सीहोर, उज्जैन, धार, अशोकनगर में समय पर रोपाई हो गई, इसलिए पराली जलाने की घटनाएं यहां अधिक सामने आई हैं।
- कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक ग्वालियर अंचल में जब कटाई होगी तो इसके बाद गेहूं की बुवाई के लिए समय कम मिलेगा। ऐसे में किसान द्वारा खेतों को जल्द खाली करने के लिए पराली जलाने की अधिक आशंका है।
देश में पराली जलाने के मामले
- मध्य प्रदेश 340
- पंजाब 174
- उत्तर प्रदेश 127
- हरियाणा 07
- उत्तराखंड 05
प्रदेश में पराली जलाने के मामले
- गुना 45
- उज्जैन 35
- धार 27
- अशोकनगर 25
- देवास 22
- इंदौर 20
- ग्वालियर 02
पिछले दो साल की स्थिति
- प्रदेश 2024 2025
- मध्य प्रदेश 6496 17067
- पंजाब 6154 5114
- उत्तर प्रदेश 1808 7290
- हरियाणा 944 662
पंचायत स्तर पर समितियां सक्रिय, राजस्व अमला कर रहा निगरानी
पराली जलाने से रोकने के लिए पंचायत स्तर पर समितियों को सक्रिय किया गया है। राजस्व अमले के कर्मचारी भी निगरानी कर रहे हैं। किसानों के खिलाफ प्रशासन जुर्माने की कार्रवाई भी करेगा। हालांकि इस बार किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर जैसी मशीनें भी अधिक संख्या में खरीदी हैं। इसलिए उम्मीद है कि इस बार इन घटनाओं पर रोक लगेगी। भानुप्रकाश शर्मा, उप संचालक कृषि विभाग, ग्वालियर।