'बाइक पर जबरन बैठाकर ले जाना संभव नहीं', दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल; आरोपी बरी
शिवपुरी कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में डीएनए रिपोर्ट मेल न खाने और एफआईआर में देरी के कारण आरोपी को बरी करते हुए पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 07:33:06 AM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 07:33:06 AM (IST)
दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल। (फाइल फोटो)HighLights
- शिवपुरी कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी।
- डीएनए रिपोर्ट में आरोपी का सैंपल नहीं खाया मेल।
- घटना के तीन दिन बाद दर्ज कराई गई एफआईआर।
नईदुनिया प्रतिनिधि शिवपुरी: महिला थाना शिवपुरी के बहुचर्चित अपराध क्रमांक 45/2025 के फैसले ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्र न्यायाधीश राजेन्द्र प्रसाद सोनी की अदालत ने आरोपी बत्तू उर्फ बातू आदिवासी को बरी करते हुए फैसले में साफ लिखा है कि जांच अधिकारी वैज्ञानिक साक्ष्य को दरकिनार कर केवल कथन के भरोसे चालान पेश कर गए।
फैसले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत अब्बास अली चौधरी बनाम असम राज्य का हवाला देते हुए अदालत ने लिखा, यह सिद्धांत नहीं है कि पीड़िता सदैव ही संपूर्ण घटनाक्रम का सत्य वर्णन करती है। दुष्कर्म के मामले में भी अभियोजन को संदेह से परे साबित करना होगा।
ये है पूरा मामला
- अभियोजन के अनुसार 19 दिसंबर 2025 रात पीड़िता जब थोड़ी दूर रहने वाले अपने देवर के घर पर सब्जी लेने गई थी, तभी रास्ते में गांव का बातू आदिवासी आया और आरोपी ने उसे जबरदस्ती कुछ पिलाया और बाइक पर बिठा कर एक किमी दूर सरसों के खेत में ले गया। जहां उसके साथ दुष्कर्म किया। दुष्कर्म के बाद पीड़ित रात भर वहीं पड़ी रही, जबकि आरोपी भाग गया।
- 23 दिसंबर 2025 को महिला थाना शिवपुरी में मामले की रिपोर्ट लिखाई गई। प्रकरण की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर न्यायाधीश ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। आरोपी की ओर से पैरवी एडवोकेट चंद्रभान सिकरवार ने की।
कोर्ट ने यह भी की टिप्पणी
- स्वयं बाइक चलाने वाला व्यक्ति पीछे बैठी महिला को जबरदस्ती बैठाकर ले जाए, यह संभव प्रतीत नहीं होता। प्रतिपरीक्षा में महिला ने माना कि वह चिल्लाई नहीं, रास्ते में गिरी भी नहीं।
- जिस जगह से उठाने की बात कही गई, उसके आसपास गांव के लोगों के मकान हैं। देवर मोहन का घर भी वहीं है। उस समय कुछ परिजन जाग रहे थे, कुछ सो रहे थे, लेकिन पीड़िता ने शोर नहीं मचाया। कोर्ट ने इसे स्वाभाविक आचरण के विपरीत माना।
- घटना 19-20 दिसंबर 2025 रात की बताई गई, जबकि रिपोर्ट 23 दिसंबर को महिला थाना शिवपुरी में लिखाई गई। इस देरी का कोई मेडिकल या ठोस कारण नहीं दिया गया।
- 24 घंटे के भीतर मेडिकल के लिए आवेदन हुआ, लेकिन 23 तारीख को डॉ. निक्की मिश्रा द्वारा परीक्षण में शरीर पर कोई चोट, खरोंच नहीं मिली। हाइमन पुराना फटा हुआ मिला।
- डीएनए रिपोर्ट में साफ लिखा है, पुरुष डीएनए का प्रोफाइल आरोपी बत्तू के रक्त नमूने से मेल नहीं खाता। अर्थात विज्ञान ने अभियोजन को सपोर्ट नहीं किया।
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