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लाड़ली बहना योजना पर फिलहाल रोक नहीं, हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब, अंतिम फैसला होना अभी बाकी

Ladli Behna Yojana: आदेश में हाई कोर्ट ने लाड़ली बहना योजना को बंद करने, भुगतान रोकने या योजना की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। फिलहाल मामला...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 10:41:57 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 10:41:57 PM (IST)
लाड़ली बहना योजना पर फिलहाल रोक नहीं, हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब, अंतिम फैसला होना अभी बाकी
लाड़ली बहना योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई।

HighLights

  1. लाड़ली बहना योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई
  2. सरकार को हिंदी अनुवाद के साथ नोटिस तामील कराने के निर्देश
  3. लाड़ली बहना के लाभार्थियों का डेटा याचिकाकर्ता को दे सरकार

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बुधवार को संबंधित पक्षों प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग, प्रमुख सचिव वित्त विभाग, मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन को नोटिस जारी किए हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकार को योजना के सभी हितग्राहियों का विवरण याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें प्रकरण में पक्षकार बनाया जा सके। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की।


योजना की आकलन कराने की मांग की गई

याचिकाकर्ता सुधा की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा द्वारा दायर याचिका में लाड़ली बहना योजना की वर्तमान व्यवस्था, इसके तहत किए जा रहे बड़े पैमाने पर नियमित भुगतान और राज्य पर पड़ने वाले वित्तीय दायित्व को चुनौती दी गई है।

याचिका में योजना के खर्च, लाभार्थियों की संख्या, भविष्य के वित्तीय दायित्व और योजना से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर हुए प्रभाव का आकलन कराने की मांग की गई है।

हितग्राहियों को पक्षकार बनाने और नोटिस तामील पर कोर्ट के निर्देश

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई कि योजना के सभी हितग्राहियों को प्रकरण में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हितग्राहियों का पूरा विवरण राज्य सरकार के पास उपलब्ध है।

इसलिए सरकार यह जानकारी याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए, ताकि आवश्यक हितग्राहियों को पक्षकार बनाया जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हितग्राहियों को नोटिस की तामील कराने का पूरा भार याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता। राज्य सरकार को याचिका का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराकर संबंधित हितग्राहियों को नोटिस की तामील कराने की व्यवस्था करनी होगी।

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प्रारंभिक आपत्ति वापस और आगे की प्रक्रिया

राज्य के अधिवक्ता ने बाद में प्रारंभिक आपत्ति वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने वापस लिया हुआ मानते हुए स्वीकार कर लिया। इसके बाद कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। प्रक्रिया शुल्क तीन कार्य दिवस में जमा कराने और इसके बाद प्रकरण को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस आदेश में हाई कोर्ट ने लाड़ली बहना योजना को बंद करने, भुगतान रोकने या योजना की वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। फिलहाल मामला नोटिस और आगे की सुनवाई के चरण में है।