
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 18 मौतों के बाद अब नगर निगम द्वारा कई कवायद की जा रही हैं। इसके अंतर्गत टंकियों की सफाई से लेकर बोरिंग के क्लोरीनेशन तक का काम हो रहा है। इसके बावजूद शहर की बड़ी आबादी तय मानक से अधिक टोटल डिजाल्व्ड सालिड्स (टीडीएस) का पानी पीने के लिए मजबूर है।
खासकर उन इलाकों में ज्यादा दिक्कतें हैं, जहां तिघरा के पानी की आपूर्ति नहीं होती है और लोग बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। इनमें कई कालोनियों के अलावा पाश टाउनशिप भी शामिल हैं, जहां पानी की दिक्कतों के कारण लोग अब बाजार से पानी मंगाकर पी रहे हैं।
शहर में नईदुनिया के आठ रिपोर्टरों ने शहर के अलग-अलग 50 स्थानों पर पानी के सैंपल लेकर टीडीएस चेक किए, तो इसकी मात्रा तय मानक से ज्यादा निकली। शहर के सिटी सेंटर, गोविंदपुरी, अनुपम नगर सहित कई पाश इलाके अब भी बोरिंग पर निर्भर हैं। इसके अलावा शहरभर में निगम के ही 2600 के आसपास बोरवेल हैं, जिनसे चार लाख की आबादी को पानी की आपूर्ति होती है। कई इलाकों में बोरिंग के पानी का टीडीएस 500 से 600 मिलीग्राम तक पहुंच रहा है।

इस प्रकार का पानी यदि लंबे समय तक पीना पड़े, तो लोगों को पथरी से लेकर अन्य गंभीर बीमारियां होने का खतरा पैदा हो जाता है। जिन लोगों को यह समस्या होती है, तो वे घर में आरओ या साफ्टनर का उपयोग करते हैं। सिटी सेंटर क्षेत्र के अधिकतर घरों में या तो लोगों को आरओ लगवाना पड़ा या फिर वे अलग से बाजार से पानी खरीदकर पीते हैं। नईदुनिया टीम ने शहर के कई इलाकों में सप्लाई होने वाले पानी के सैंपल लेकर टीडीएस चेक किया, तो सभी स्थानों पर इसकी मात्रा 500 से 600 के बीच मिली।
मंगलवार को ग्वालियर में शहर के 13 अलग-अलग स्थानों पर पेयजल की सैंपलिंग कराई गई। निगम के अमले ने मंगलवार को वार्ड एक लक्ष्मीपुरम, वार्ड चार बारह बीघा बहोड़ापुर, वार्ड पांच आनंद नगर, वार्ड 50 रामसिंह का बाग आदि क्षेत्रों से सैंपल लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया।
एक्सपर्ट व्यू : ज्यादा टीडीएस से पथरी से लेकर ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा
पानी में टीडीएस यानी घुले हुए खनिजों की मात्रा सेहत पर सीधा असर डालती है। बहुत ज्यादा या बहुत कम टीडीएस दोनों ही स्थितियां नुकसानदायक हो सकती हैं। यदि पानी में टीडीएस बहुत अधिक हो तो उसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड जैसे तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। इसके गैस, अपच, दस्त, लंबे समय तक सेवन से पथरी का खतरा, ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत हो सकती है। कम टीडीएस वाला पानी से शरीर को जरूरी खनिज नहीं मिल पाते, जिससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है, हड्डियों और दांतों पर भी असर पड़ता है। लंबे समय तक इसे पीने से इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होते है। - डॉ. नीतेश मुदगल, एमडी मेडिसिन
यह सही है कि कई इलाकों में अब भी तिघरा का पानी नहीं पहुंच रहा है और लोग बोरिंग पर निर्भर हैं। हालांकि अमृत योजना के दूसरे चरण में छूटे हुए इलाकों का चयन किया गया है, ताकि हर घर तक नलों में पानी पहुंच सके और लोग भूमिगत जल का उपयोग ना करें। - संघ प्रिय, आयुक्त नगर निगम