
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रूपये की संपत्ति के विवाद के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बुधवार को संपत्ति विवाद में पेश किए गए अंतरिम आवेदनों पर बहस पूरी हो गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी की ओर से प्रस्तुत आवेदन को न्यायालय ने पिछली सुनवाई में स्वीकार कर लिया था। इसी आपत्ति पर बुधवार को दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस हुई। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए 14 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा देवी ने सहमति से हुए बंटवारे का विरोध किया। प्रतिमा देवी का तर्क है कि बंटवारे पर जो हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, धोखे से कराए गए हैं। इसके लिए साक्ष्य कराए जाएं। उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने विरोध करते हुए कहा कि हस्ताक्षर सहमति से हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद परिवार का डिनर भी हुआ था। फोटग्राफ्स भी खींचे गए थे। इसलिए धोखे से हस्ताक्षर नहीं कराए हैं। वहीं सिंधिया की ओर से कहा गया कि साक्ष्य की जरूरत नहीं है, हस्ताक्षर सहमति के साथ हुए हैं। कोर्ट फैसला साक्ष्य या आवेदनों को सुनने के बाद कर सकता है।
बता दें कि पिछली सुनवाई में प्रतिमा देवी ने अपनी आपत्ति में कहा है कि संपत्ति विवाद से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही में उन्हें उचित रूप से पक्षकार नहीं बनाया गया और अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उनका कहना है कि उन्हें वसीयत तथा संपत्ति से संबंधित जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें भेजे गए नोटिस नेपाल के नेपालगंज पते पर भेजे गए, जबकि वह करीब 20 साल से काठमांडू में रह रही हैं। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एक्स पार्टी किए जाने पर भी सवाल उठाया है।
इस मामले में वादी यशोधरा राजे की ओर से अधिवक्ता प्रशांत शर्मा व संदीप ग्रोवर शामिल हैं। प्रतिवादी क्रं एक ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से सोमप्रताप सिंह तोमर व अंकुर मोदी हैं। प्रतिवादी क्रं 21 की ओर प्रतिमा देवी हैं जिनकी ओर से अधिवक्ता निश्चल हैं। उल्लेखनीय है कि सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे का यह विवाद लंबे समय से न्यायालय में चल रहा है। मामले में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और अन्य पक्षों के दावे जुड़े हैं। जयविलास पैलेस सहित विभिन्न संपत्तियों को लेकर अधिकार और बंटवारे के सवाल न्यायालय के समक्ष हैं। करीब 40 हजार करोड़ रुपये का मूल्यांकन बताया जा रहा है, लेकिन संपत्तियों का अंतिम मूल्य और विभिन्न पक्षों का हिस्सा अभी न्यायालय ने तय नहीं किया है।
पांच साल चली बंटवारे की प्रक्रिया तब हुए हस्ताक्षर कोर्ट में बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री सिंधिया की ओर से बताया गया कि यह बंटवारा एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है, इसमें लगभग पांच साल का समय लगा। सभी ने सहमति से हस्ताक्षर किए हैं। इसके लिए विधिवत डाक्यूमेंट तैयार किए गए और सभी के अधिवक्तागण भी रहे। इसके पूरा होने बाद डिनर और फोटोग्राफ्स भी खींचे गए थे। बहस के दौरान यह भी बताया गया कि प्रतिमा देवी को इस बंटवारे पर आपत्ति है लेकिन उनकी इसी मामले में कनिकादेवी ने कोई आपत्ति पेश नहीं की है। प्रतिमा देवी ने कहा-बंटवारे पर उनका क्या हिस्सा पता नहीं था प्रतिमा देवी की ओर से बताया गया कि जिस बंटवारे पर उनके सहमति से हस्ताक्षर होना बताए गए हैं उस डाक्यूमेंट में उनके हिस्से में क्या क्या आया यह उन्हें जानकारी नहीं थी। इसके अलावा अन्य जो दस्तावेज इसमें शामिल किए गए उसकी भी जानकारी नहीं है।
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