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सिंधिया राजघराना संपत्ति विवाद: 40 हजार करोड़ की जंग का राजीनामा टला, कोर्ट में रिकॉर्ड न होने से बढ़ी तारीख

न्यायालय में समझौते को विधिक मान्यता देने से पहले मूल रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक था। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत ने समझौते पर कोई आदेश पारित...और पढ़ें

By Varun SharmaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 08:43:17 PM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 08:43:17 PM (IST)
सिंधिया राजघराना संपत्ति विवाद: 40 हजार करोड़ की जंग का राजीनामा टला, कोर्ट में रिकॉर्ड न होने से बढ़ी तारीख
सिंधिया राजघराना संपत्ति विवाद

HighLights

  1. सिंधिया राजघराने के 40 हजार करोड़ के संपत्ति विवाद का टला निपटारा
  2. रिकॉर्ड पेश न होने के कारण ग्वालियर कोर्ट ने 20 जुलाई तक टाली सुनवाई
  3. ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच आपसी राजीनामे पर टिकी नजर

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सिंधिया राजघराने की लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के करीब चार दशक से चले आ रहे बहुचर्चित विवाद का निस्तारण टल गया। ग्वालियर जिला न्यायालय में बुधवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ- राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और ऊषा राजे के बीच हुए राजीनामे पर कानूनी सहमति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन मामले से संबंधित संपूर्ण रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत नहीं होने के कारण सुनवाई 20 जुलाई तक स्थगित कर दी गई।

दरअसल, न्यायालय में समझौते को विधिक मान्यता देने से पहले मूल रिकॉर्ड का परीक्षण आवश्यक था। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण अदालत ने समझौते पर कोई आदेश पारित नहीं किया और अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी। अब रिकॉर्ड प्रस्तुत होने के बाद ही राजीनामे पर न्यायिक मुहर लगने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। मामले में समझौते की प्रक्रिया ग्वालियर की अष्टम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड के न्यायालय में की जानी है।


सूत्रों के अनुसार, न्यायालय में पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड में विवादित चल-अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण शामिल है। माना जा रहा है कि राजपरिवार नहीं चाहता कि इस संवेदनशील संपत्ति का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बने। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

देश के सबसे बड़े पारिवारिक संपत्ति विवादों में से एक

यह विवाद सिंधिया राजघराने की देशभर में फैली करीब 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों से जुड़ा है। इनमें ग्वालियर स्थित लगभग 12.40 लाख वर्गफीट में फैला जयविलास पैलेस, शिवपुरी के माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, दिल्ली का ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड स्थित संपत्तियां, पुणे का पद्म विलास पैलेस, वाराणसी का सिंधिया घाट, गोवा स्थित विठोबा मंदिर तथा आजादी के समय सिंधिया परिवार की विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी शामिल हैं।

अदालत के दायरे से बाहर हैं कई संपत्तियां

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन संपत्तियों का क्षेत्राधिकार ग्वालियर जिला न्यायालय के बाहर है, उनके स्वामित्व या बंटवारे पर अदालत कोई आदेश नहीं दे सकती। ऐसे मामलों में राजपरिवार आपसी सहमति से संपत्ति का बंटवारा तय करेगा और उसी आधार पर न्यायालय में लंबित दावों का निराकरण होगा।

जयविलास पैलेस पर सबकी नजर

सूत्रों के मुताबिक, समझौते में सबसे अहम मुद्दा ग्वालियर के ऐतिहासिक जयविलास पैलेस का स्वामित्व है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इस संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व अपने पास रखना चाहते हैं। इसके बदले अन्य संपत्तियों के पुनर्वितरण पर परिवार के भीतर सहमति बनने की चर्चा है। हालांकि समझौते की शर्तों को लेकर किसी पक्ष ने आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

1988 से चल रही है कानूनी लड़ाई

संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1988-89 में हुई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दावा किया कि ग्वालियर, गुना, शिवपुरी और पुणे की संपत्तियां उनके पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के माध्यम से उन्हें उत्तराधिकार में प्राप्त होती हैं। बाद में स्वर्गीय माधवराव की तीनों बहनों और राजमाता विजयाराजे सिंधिया की पुत्रियों- ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने भी जिला न्यायालय में दावा दायर कर पैतृक संपत्ति में समान वैधानिक अधिकार की मांग की।

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दोनों पक्षों के दावे वर्षों तक जिला न्यायालय और बाद में उच्च न्यायालय में लंबित रहे। अब आपसी सहमति बनने के बाद इस बहुचर्चित विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता खुला है, लेकिन अंतिम न्यायिक मुहर के लिए अभी 20 जुलाई की सुनवाई का इंतजार करना होगा।