
वरुण शर्मा.ग्वालियर। देश की सुरक्षा में सेना के योगदान से सभी भली-भांति परिचित हैं। ऐसे में ग्वालियर शहर में सेना के अलग-अलग केंद्रों की भूमिका भी स्वत: स्पष्ट हो जाती है। यहां मौजूद वायु सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित अर्द्घसैनिक बलों के बड़े केंद्रों ने समय-समय पर अपनी सामरिक क्षमता से पूरे देश में अपना नाम रोशन किया है। सेना की इस सफलता के साथ नईदुनिया ने भी कदम-से कदम मिलाए। अपने सुधि पाठकों तक सेना के हर हौसले और साहसिक कारनामों को हमने निरंतर पहुंचाया। इतना ही नहीं नईदुनिया ने अपने पाठकों को हमेशा समस्याओं के खिलाफ जागरूक करने, विकास के लिए आवाज उठाने का हौसला देने का काम भी किया है, जो निरंतर जारी है।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मप्र के ऐतिहासिक ग्वालियर का अतीत तो गौरवशाली है ही, भविष्य भी काफी उज्ज्वल है। सेना, वायु सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ सहित अर्द्घसैनिक बलों के बड़े केंद्रों के साथ ग्वालियर के साथ एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। देश का रक्षा मंत्रालय शहर में 143 एकड़ क्षेत्र में बीएसएल-4 लैब बनाने जा रहा है। चीन और अमेरिका के स्तर वाले इस लैब में 300 से 400 करोड़ रुपये का खर्च संभावित है। इसके लिए भूमि का आवंटन हो चुका है। डीआरडीई की विश्वस्तरीय नई लैब महाराजपुरा में बनने जा रही है, जो कि लेयर-4 लैब होगी। यह अभी तक देश में सिर्फ पुणे में ही है। यही नहीं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की काउंटर मैग्नेट सिटी में इंडो-तिब्बत बार्डर फोर्स 100 एकड़ में अपना परिसर भी तैयार करेगा।
ऐसे समझें देश में क्यों महत्वपूर्ण है ग्वालियर
डीआरडीई के उत्पादों को दुनिया में मिली सराहना : डीआरडीई के उत्पाद पूरे विश्व को भा रहे हैं। साल की शुरूआत में हुए इजिप्ट डिफेंस एक्सपोट्ठ2021 में डीआरडीई के एनबीसी सूट, कैनिस्टर सहित विभिन्न उत्पादों की इजरायल सहित कई देशों ने सराहना की। अब मौजूदा समय में विभिन्न देशों से डिमांड आ रही है। डीआरडीई की ओर से जिन सुरक्षा उत्पाद तैयार करने वाली कंपनियों को तकनीक ट्रांसफर की गई है, उनके माध्यम से यह डिमांड पूरी कराई जाएगी।
ग्वालियर का महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन 1942 में बना था और कई युद्घों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्घ में इसी एयरफोर्स स्टेशन से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी थी। 1999 के कारगिल युद्घ में भी ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन से उड़े लड़ाकू विमानों ने बम बरसाए थे। नईदुनिया ने हमेशा सेना के शौर्य को प्रमुख खबर बनाया है।
बीएसएफ अकादमी
दिेश की इकलौती बीएसएफ अकादमी जहां सुरक्षा बलों का प्रशिक्षण और रक्षा उत्पादों का निर्माण ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में देश ही नहीं विदेश के भी सुरक्षा बलों को ट्रेनिंग दी जाती है। देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस से लेकर जेल पुलिस और एसटीएफ तक यहां ट्रेनिंग लेती है। इसके साथ ही स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग के लिए बीएसएफ अकादमी विशेष महत्व रखती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का डाग ट्रेनिंग सेंटर जहां देश-विदेश के डाग को अलग-अलग विधा में ट्रेंड किया जाता है।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्वालियर एयरबेस
इंडियन एयरफोर्स के मिराज एयरक्राफ्ट का ग्वालियर स्थित महाराजपुरा एयरबेस सबसे बड़ा स्टेशन है। एयर स्ट्राइक में ही नहीं, बल्कि 17 साल पहले भी यहां के मिराज कारगिल युद्घ में इतिहास बना चुके है। कारगिल युद्घ के समय मिराज ने ग्वालियर से उड़ान भरकर तीस हजार फीट की उंचाई से दुश्मन पर हमला किया था, जिसमें लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल हुआ था। दुश्मनों पर कहर बरपाने वाले मिराज एयरक्राफ्ट का बेस बना महाराजपुरा कारगिल युद्घ के समय आपरेशनसफेद सागर में अपने जौहर दिखा चुका है। एक और खास बात यह कि कारगिल की पहाड़ियों में छिपे दुश्मन ज्यादा हमलावर होने लगे तो उन्हें मारने की जिम्मेदारी ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर तैनात मिराज स्क्वाड्रन को सौंपी गई थी।
हवा से हवा में फ्यूल भरने का इतिहास भी ग्वालियर के आसमान में रचा था
देश का दूसरे नंबर का एयरफोर्स एयरबेस ग्वालियर में है, जो अपने आप में विशेष महत्व रखता है। लड़ाकू विमानों को समय-समय पर यहां से भी शामिल किया जाता है। हवा से हवा में फ्यूल भरने का करतब भी ग्वालियर के आसमान में एयरफोर्स ने कर दिया था। एयर स्ट्राइक के दौरान लड़ाकू विमान भी ग्वालियर एयरबेस से उड़े थे। ग्वालियर एयरबेस कड़ी सुरक्षा में रहता है। ग्वालियर का ये महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन 1942 में बना था और अब तक हुए युद्घों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है। 1965, 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्घ में इसी एयरफोर्स स्टेशन से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी थी। 1999 के कारगिल युद्घ में भी ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन से गए लड़ाकू विमानों ने बम बरसाए थे। ग्वालियर का ये एयरफोर्स स्टेशन देश का एकमात्र एयरबेस है, जहां फाइटर प्लेन में हवा में ईंधन भरा जा सकता है।