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हरदा में स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता पर फूटा गुस्सा: मर्चुरी में रखने के बजाय गाड़ी में छोड़ा शव, भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी

सुखरास निवासी संतोष अटले की ट्रेन हादसे में मौत के बाद शव को मर्चुरी में रखने के बजाय घंटों शव वाहन में छोड़ने का आरोप लगा, जिससे अस्पताल प्रबंधन पर स...और पढ़ें

By Anilkumar ManikEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 04:49:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 04:49:17 PM (IST)
हरदा में स्वास्थ्य विभाग की संवेदनहीनता पर फूटा गुस्सा: मर्चुरी में रखने के बजाय गाड़ी में छोड़ा शव, भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी
हरदा में शव को घंटों शव वाहन में छोड़ने का आरोप। नईदुिनया।

HighLights

  1. शव को मर्चुरी में रखने के बजाय घंटों शव वाहन में छोड़ने का आरोप
  2. भीम आर्मी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए
  3. सूचना न मिलने और कागजी कार्रवाई के चलते पोस्टमार्टम में हुआ विलंब

नईदुनिया प्रतिनिधि, हरदा/ खिरकिया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन और कर्मचारियों की लापरवाही का एक अमानवीय मामला सामने आया है। हाल ही में सुखरास निवासी 40 वर्षीय संतोष अटले की ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत हो गई थी। छीपाबड़ पुलिस द्वारा मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता के कारण मृतक के शव को मर्चुरी रूम (शव गृह) में रखने के बजाय, घंटों तक शव वाहन में ही छोड़ दिया गया।

इसके चलते शव खराब (डिस्मेंटल) होने की कगार पर पहुंच गया और पोस्टमार्टम में अत्यधिक देरी होने से स्थिति और अधिक बिगड़ गई।

भीम आर्मी ने उठाए प्रबंधन पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर भीम आर्मी के सुनील खंडेल ने बीएमओ और अस्पताल के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त किया। उन्होंने प्रेस में बयान जारी कर कई गंभीर आरोप लगाए। सवाल उठाते हुए कहा कि मर्चुरी रूम होने के बावजूद शव को गाड़ी में छोड़ देना अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।


अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा आम नागरिकों को जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्कर कटवाए जाते हैं और परेशान किया जाता है। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई नहीं है। यहां तक कि जांच कक्ष (लेब) में मरीजों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

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मरीजों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

स्थानीय स्तर पर इलाज मुहैया कराने के बजाय ज्यादातर मरीजों को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। इसके अलावा खिरकिया और जिला अस्पताल के बीच में रेलवे फाटक पड़ता है। फाटक बंद होने की स्थिति में गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे मरीजों को अपनी जान का जोखिम उठाना पड़ता है।

भीम आर्मी और स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर से खिरकिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लापरवाह कर्मचारियों और बीएमओ पर तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

शव वाहन को लाकर खड़ा कर दिया और अस्पताल में सूचना नहीं दी गई। पुलिस को सूचना देने के बाद कागजी कार्रवाई में समय लगा। इसके बाद पीएम हो सका। किसी की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एचपी सिंह, सीएमएचओ, हरदा