
नईदुनिया प्रतिनिधि, हरदा। पटाखा फैक्ट्री के पास शासकीय आईटीआई के पीछे रहने वाले रहवासी धमाके के बाद अपनी जान बचाकर सामरधा गांव की ओर भागे। इसी के पास शासकीय प्राथमिक शाला बैरागढ़ के बच्चे और शिक्षक भी ग्रामीणों के पीछे चल गए। एक के बाद एक होते गए धमकों के कारण स्कूली और कई महिलाएं बदहवास स्थिति में आ गए। रोते रोते अपने स्वजनों के लिए उन्हें बचाने की बात कहते रहे।
कई बच्चे काम करते हैं फैक्ट्री में
कई बच्चे पटाखा फैक्ट्री में काम करते हैं। कोई बच्चा अपनी मां तो कई पिता के बारे में पूछ पूछकर रोते रहे। सामरधा रोड पर बने जय दादू शिव शिव आश्रम में ग्रामीण और बच्चे पहुंचे। आश्रम में संचालक पुरुषोत्तम बाबा सहित सामरधा के छोटू पटेल, अभिषेक कालीराणा, बबलू पटेल, नवीन सारन, प्रवीण सारन, निर्मल पटेल आदि ग्रामीणों ने महिलाओं और बच्चों को संभाला। अभिषेक कालीराणा व बृजमोहन सारन ने प्रभावित लोगों के लिए बिस्किट व नाश्ते की व्यवस्था की।
विधायक ने सीबीआई जांच की मांग की
स्थानीय विधायक डा. रामकिशोर दोगने ने मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को पत्र प्रेषित कर पटाखा फैक्ट्री हुए हादसे की सीबीआइ जांच कराए जाने की मांग की है। विधायक डा. दोगने ने कहा कि उक्त पटाखा फैक्ट्री कई वर्षों से संचालित है। पहले भी इसमें इस तरह की घटनाएं हो चुकी है। जनधन की हानि हो चुकी है, फिर भी प्रशासन द्वारा पटाखा फैक्ट्री का संचालन हरदा शहर की सीमा के अंदर हो रहा था। उसे बंद नहीं कराया गया। यह प्रशासन की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह है। इसलिए उक्त पूरे प्रकरण की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए। उसमें जो भी दोषी पाया जाए उस पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
वन विभाग ने मुक्तिधाम में भेजी तीन ट्रक लकड़ी
भयावह हादसे के बाद जिला प्रशासन ने मृतक की संख्या 11 बताई है। जबकि मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए की गई व्यवस्था तो कुछ और ही कहानी बता रही है। इससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रशासन ने पटाखा फैक्ट्री एवं गोदाम में हुए हादसे के मृतकों की संख्या 11 बताई है। जबकि हरदा मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए तीन ट्रक लकड़ी की व्यवस्था की है। जबकि मृतकों में किसी एक धर्म विशेष के लोग भी शामिल है। डीएफओ अनिल चोपड़ा ने बताया कि वन विभाग द्वारा नगर पालिका परिषद को करीब तीन ट्रक लकङी उपलब्ध कराई गई है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि मंगलवार को कितने शव का अंतिम संस्कार किया जाना है।