
विजय विश्नोई, हरदा। मंगलवार का दिन पटाखा फैक्ट्री की चपेट में आए लोगों के लिए अमंगल साबित हुआ। इस हादसे में किसी ने अपना पिता खोया तो किसी ने अपनी मां। कई प्रभावित ऐसे भी हैं, जिन्होंने भाई, बहन तो अन्य कई रिश्तेदार खो दिए। हादसे में जिनकी मौत नहीं हुई तो कई कइयों को हाथ-पैर, आंख सहित अन्य जगह शरीर पर चोट लग गई। तो किसी को अपनी कलाई गंवानी पड़ी। इनमें बच्चे भी शामिल हैं और वयस्क भी।
यह कह पाना भी मुश्किल
अभी यह कह पाना मुश्किल होगा कि कौन लोग पहले की तरह मजदूरी कर अपना पेट भर पाएंगे या नहीं। इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। जिले में यह बड़ा हादसा हो गया। आसपास रहने वाले 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। कुल चार विस्फोटों से कई घरों में गम छा गया। बताया गया कि जिस फैक्ट्री में यह हादसा हुआ है वहां पटाखे बनाए जाते थे। आसपास के करीब साठ घर में ढेर सारे पटाखे और बारूद रखे हुए थे। मरने वालों मजदूर और कुछ अन्य लोग शामिल हैं।
होते रहे धमाके और मरते रहे लोग
देखते ही देखते पूरे पटाखों में धमाका होना शुरू हो गया और घर आग की चपेट में आ गए। आग भड़की तो फैक्ट्री के आसपास बने घरों को भी अपनी जद में ले लिया। पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट इतना भीषण था कि ग्यारह लोगों की मौत हो गयी और डेढ़ से अधिक लोग घायल हो गए। ये फैक्ट्री रिहायशी इलाके में बीच में चल रही थी। दीपावली के समय भी यहां पटाखे बनाने का काम दिन रात चल रहा था।
नहीं दिया लोगों को संभलने का मौका
जिला मुख्यालय पर पटाखा फैक्ट्री में जबरदस्त विस्फोट हो गया। ये फैक्ट्री जो बीच बस्ती में चलायी जा रही थी। सूत्रों की मानें तो पटाखा बनाते वक्त विस्फोट हुआ। ये इतना भीषण था कि पटाखा बना रहे लोगों में से 11 की मौत हो गयी। जबकि पहला विस्फोट हुआ तो लोग कुछ ज्यादा समझ नहीं पाए। क्योंकि बताया जा रहा है कि फैक्ट्री की शटर लगाकर अंदर पटाखे बनाए जाते थे। इसके बाद एक के बाद एक चार भीषण विस्फोट होते गए और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया गया।
बीच बस्ती में अवैध थी फैक्ट्री
जिला मुख्यालय पर घनी बस्ती के बीच ये पटाखा फैक्ट्री चलायी जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। हालांकि समय समय पर कार्रवाई होती थी, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया यगा। अब जब इतना भीषण हादसा हो गया तो प्रशासन के जिम्मेदारों के भी हाथ-पांव फूल गए। समय रहते ही अगर जिम्मेदार अपनी जिम्मेेदारी सही से निभाते तो शायद यह फैक्ट्री आज बस्ती के बीच में नहीं होती। आज तो इतनी मौते हुई है तो वह टाली जा सकती थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी शायद अपनी जिम्मेदारी भूल गए। इसी का परिणाम है कि आज इतना बड़ा हादसा हो गया। इस कारण कई घर उजड़ गए।
हादसे में इनकी हुई मौत
7 मृतकों की पहचान, बाकी की शिनाख्त नहीं हुई है
• बानो बी पति सलीम खेड़ीपुरा।
• प्रियानु पिता मुन्ना लाल प्रजापति खेड़ीपुरा।
• मुबीन पिता शकूर खान मानपुरा।
• अनुज पिता सोभा कुचबंदिया टँकी मोहल्ला हरदा।
• आबिद पिता रहमान खान मानपुरा।
• उषा पति मुकेश बेलदार बैरागढ़।
• मुकेश पिता तुलसीराम बैरागढ़।
• दो लोगों की शिनाख्त नहीं।
• 200 घायल है, जिसमें महिला और बच्चे भी शामिल हैं।