नर्मदापुरम: पचमढ़ी में अब होगी काली मिर्च और दालचीनी की खेती, उद्यानिकी विभाग ने तैयार की खास नर्सरी
उद्यानिकी विभाग ने पचमढ़ी के पोलो उद्यान में मसालों की नर्सरी तैयार की है। यहां तैयार पौधे पहली बार किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि प्रायोगिक खेती...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 11:36:47 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 11:36:47 AM (IST)
उद्यानिकी विभाग ने नर्सरी में अभी काली मिर्च के 100 पौधे तैयार किए गए हैं। दालचीनी और तेज पत्ता के पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं। नईदुनिया।HighLights
- पचमढ़ी में काली मिर्च, दालचीनी और तेज पत्ता की खेती का विस्तार
- पहले 100 काली मिर्च के पौधे तैयार, आगे 500-500 पौधों का लक्ष्य
- किसानों को प्रशिक्षण, शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
नईदुनिया प्रतिनिधि, नर्मदापुरम। प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में वर्षों से प्रायोगिक स्तर पर हो रही काली मिर्च, दालचीनी और तेज पत्ता की खेती विस्तार के लिए तैयार है। उद्यानिकी विभाग ने इस प्रयोग को किसानों तक पहुंचाकर इनके व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआती कोशिश में जुट रहा है।
इसके तहत पचमढ़ी के पोलो उद्यान में मसालों की एक नर्सरी तैयार की गई है। यहां काली मिर्च, तेज पत्ता, दाल चीनी के पौधे तैयार कर पहली बार किसानों को बेचे जाएंगे।
अनुकूल है हिल स्टेशन की जलवायु
दरअसल काली मिर्च, तेज पत्ता और दालचीनी प्रमुख मसाला फसलें हैं, जिनके लिए विशिष्ट जलवायु चाहिए। दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट के पहाड़ों में काली मिर्च और दालचीनी की खेती सबसे अधिक होती है।
केरल और कर्नाटक इसके सबसे बड़े उत्पादक हैं। इसी तरह तेजपत्ता की खेती पूर्वोत्तर के हिमालयी क्षेत्र में होती है। पश्चिम बंगाल और मेघालय इसके बड़े उत्पादक हैं।
ब्रिटिश काल में हुआ प्रयोग
ब्रिटिश काल में अंग्रेज सैन्य-असैन्य अधिकारियों ने यहां की भौगोलिक और जलवायु संबंधी अनुकूलता को देखते हुए इन मसालों को उगाने का प्रयोग किया था। कुछ अधिकारियों के बंगलों में इनको लगाया गया था, तब से स्थानीय नर्सरी में प्रायोगिक तौर पर पौधे उगाए गए और विशिष्ट मेहमानों को दिए जाने अथवा पर्यटकों को बेचने की परंपरा रही है।
कई प्रशासनिक अधिकारियों के पुराने आवासीय परिसरों में काली मिर्च की बेल या दालचीनी का पेड़ देखा जा सकता है। इसके बावजूद कभी इनके व्यावसायिक उत्पादन की कोशिश नहीं हुई।
किसानों को होगा फायदा
अधिकारियों का कहना है कि जिले के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ मसालों का उत्पादन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा। साथ ही इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो धनिया, लहसुन, लालमिर्च, मेथी, कलौंजी, सौंफ और जीरे जैसी मसाला फसलों के साथ मध्यप्रदेश की पोटली में काली मिर्च, दालचीनी और तेजपत्ता की विशिष्ट गंध भी हो जाएगी।
नर्सरी में यह तैयारी
उद्यानिकी विभाग की नर्सरी में अभी काली मिर्च के 100 पौधे तैयार किए गए हैं। दालचीनी और तेज पत्ता के पौधे भी तैयार किए हैं। आने वाले दिनों में प्रत्येक के 500-500 पौधे तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए किसानों को प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।
पचमढ़ी में स्थानीय स्तर पर यह पहल शुरू हुई है। शासन स्तर से अभी इन मसालों के उत्पादन की कोई योजना नहीं है। इसके बारे में शासन को भी प्रस्ताव भेजेंगे। - रीता उइके, जिला उद्यानिकी अधिकारी, नर्मदापुरम