
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : महू-खंडवा रेल प्रोजेक्ट के तहत पटरियां बिछाने का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है। रेलवे लाइन के रास्ते में आने वाले पेड़ों की कटाई अक्टूबर से शुरू की जाएगी। वन विभाग ने करीब 1 लाख 34 हजार पेड़ों को कटाई के लिए चिन्हित किया है। मगर इन सभी पेड़ों को एक साथ नहीं काटा जाएगा।
रेलवे निर्माण की गति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से पेड़ों की कटाई होगी। इसके लिए दो से तीन साल का समय निर्धारित किया गया है।
परियोजना में इंदौर और खरगोन जिले की करीब 454 हेक्टेयर वनभूमि आएगी। इसमें इंदौर वनमंडल की 407 हेक्टेयर और खरगोन की करीब 46 हेक्टेयर जमीन शामिल है। पहले परियोजना के लिए करीब 1.51 लाख बाधक पेड़ चिन्हित किए गए थे। सुरंगों और वायडक्ट के निर्माण से इनमें से करीब 17 हजार पेड़ों को बचाने की योजना बनाई गई है।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से परियोजना को मार्च 2026 में अनुमति मिली थी। इसके बाद रेलवे ने अप्रैल में पेड़ों की कटाई और लकड़ी डिपो तक पहुंचाने के लिए राशि जमा की, लेकिन राशि इंदौर के बजाय रतलाम वनमंडल के खाते में पहुंच गई। इस तकनीकी गफलत के कारण करीब तीन महीने तक प्रक्रिया अटकी रही। जुलाई में दोनों वनमंडलों के बीच समन्वय बनने के बाद काम आगे बढ़ा, लेकिन मानसून में पेड़ों की कटाई नहीं होने के कारण अब अक्टूबर से कटाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
रेल मार्ग के करीब 20 किलोमीटर हिस्से में 16 सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इनमें बड़िया से बेका के बीच करीब 4.1 किलोमीटर, चोरल से मुख्यतियार बलवाड़ा के बीच 2.2 किलोमीटर और राजपुर के पास करीब 1.6 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल है। इसके अलावा करीब 12.1 किलोमीटर हिस्से में 13 छोटी सुरंगें बनाई जाएंगी। कई स्थानों पर 30-30 मीटर लंबे वायडक्ट भी बनाए जाएंगे। इन्हीं तकनीकी उपायों से हजारों पेड़ों को काटने से बचाया जाएगा।
परियोजना के लिए वन विभाग को करीब 150 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इसमें 40 करोड़ रुपये वनभूमि के बदले, 40 करोड़ रुपये पेड़ों की नेट प्रेजेंट वैल्यू और 50 करोड़ रुपये पौधारोपण के लिए खर्च होंगे। करीब एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नए पौधे लगाए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से धार और झाबुआ जिले के वनक्षेत्र शामिल होंगे, क्योंकि इंदौर वनमंडल में खाली वनभूमि उपलब्ध नहीं है।
डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने बताया कि पेड़ों की कटाई के लिए 20 से अधिक चरण तय किए गए हैं। रेलवे और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त समिति स्थल निरीक्षण कर यह तय करेगी कि किस हिस्से में निर्माण शुरू होने पर कितने पेड़ काटे जाएं। वे कहते है कि रेलवे जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ाएगी, वैसे-वैसे वन विभाग के स्तर पर चिन्हित पेड़ों की कटाई कराई जाएगी। पौधारोपण की निगरानी सीसीएफ स्तर पर की जाएगी।
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