
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना निजी स्कूलों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ साबित हो रहा है। फीस प्रतिपूर्ति की राशि समय पर न मिलने से खासकर छोटे स्कूलों के सामने शिक्षकों का वेतन देने का भी संकट खड़ा हो गया है। सिर्फ इंदौर के निजी स्कूलों के करीब 150 करोड़ रुपए अटके हुए हैं।
ये राशि जल्द जारी करने की मांग करते हुए अशासकीय शिक्षण संचालक संघ लगातार शासन को पत्र लिख रहा है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, सत्र 2024-25 के लिए फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया, दस्तावेजों का वेरिफिकेशन और आरटीई पोर्टल पर अपलोडिंग का काम मार्च तक पूरा हो चुका था। पोर्टल पर इसके रिकॉर्ड भी मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्कूलों के खातों में पैसा नहीं पहुंचा है। इस देरी के कारण प्रदेशभर के हजारों प्राइवेट स्कूल कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
नियमानुसार, निजी स्कूलों को एंट्री लेवल पर 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना होती हैं, जिसकी एवज में सरकार स्कूलों को उनके खर्च की प्रतिपूर्ति करती है। हाई कोर्ट ने भी निर्देश दिए हैं कि स्कूलों द्वारा क्लेम जमा करने के 3 महीने के भीतर सरकार प्रतिपूर्ति दावों का निपटारा करे। स्कूल संचालकों का कहना है, जमीनी स्तर पर इस समय सीमा का पालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है, स्कूलों ने बैंक खातों की जानकारी समय पर अपडेट नहीं की थी, इसलिए पूर्व के सत्रों का भुगतान नहीं हो पाया है।
मध्य प्रदेश निजी स्कूल संघ के अभिषेक शिंदे ने बताया, आरटीई के तहत सबसे ज्यादा परेशानी छोटे स्कूलों को हो रही है, जो पूरी तरह से सीमित बजट पर चलते हैं। समय पर पैसा न आने से उनके सामने संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को समय पर वेतन देना उनके लिए मुश्किल हो गया है।
सत्र 2022-23 : तकनीकी कारणों और पोर्टल पर गलत जानकारी अपलोड करने से भुगतान अटका। अब भी 34 स्कूलों को राशि का इंतजार।
सत्र 2023-24 : इस सत्र की लगभग 90 प्रतिशत राशि का भुगतान हो चुका है, करीब 200 स्कूल अब भी राशि का इंतजार कर रहे हैं।
सत्र 2024-25 : प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया पूरी, सिर्फ इंदौर के स्कूलों का 150 से 200 करोड़ का भुगतान अटका है।
सत्र 2025-26 : इस नए शैक्षणिक वर्ष के लिए प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया अभी तक शुरू ही नहीं हो पाई है।
शासन स्तर पर प्राथमिकता से स्कूलों को भुगतान किया जा रहा है। तकनीकी कारणों और पोर्टल की गलतियों की वजह से देरी हुई है। सत्र 2022-23 के 34 स्कूलों और 2023-24 के करीब 200 स्कूलों का भुगतान पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज होने के कारण अटका हुआ था। स्कूलों ने जानकारी अपडेट कर दी है, भुगतान की प्रक्रिया जारी है। वर्तमान में भोपाल स्तर पर कुछ तकनीकी दिक्कतें लंबित हैं। ये सुलझा ली जाएंगी तो स्कूलों के खातों में जल्द फंड ट्रांसफर कर दिया जाएगा। - संजय कुमार मिश्रा, जिला परियोजना समन्वयक
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