
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धारा में दर्ज मामले में आरोपित 17 वर्षीय किशोर को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने जमानत दे दी। न्यायालय ने किशोर न्याय बोर्ड और विशेष न्यायालय के उन आदेशों को निरस्त कर दिया, जिनमें उसकी जमानत याचिका खारिज की गई थी। किशोर को ₹50 हजार के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के सक्षम जमानतदार के आधार पर मां की अभिरक्षा में सौंपने का निर्देश दिया गया है।
मामला हीरानगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 को सुखलिया स्थित गीताश्री स्टूडियो के पास दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि बीच-बचाव करने पहुंचे मनीष पर चाकू और पत्थर से हमला किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की हत्या, हत्या के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। किशोर पर पत्थर से चोट पहुंचाने का आरोप बताया गया है।
किशोर की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 के तहत जमानत रोकने के लिए यह देखने की आवश्यकता है कि रिहाई से किशोर किसी ज्ञात अपराधी की संगति में आ सकता है, उसे नैतिक, शारीरिक या मानसिक खतरा हो सकता है अथवा न्याय का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध सामग्री में किशोर के किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आने की आशंका का आधार नहीं था।
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न्यायालय ने निर्देश दिया कि मां किशोर की गतिविधियों पर नजर रखें और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रत्येक पेशी पर उपस्थित कराएं। उसे किसी ज्ञात या अज्ञात अपराधी के संपर्क में आने से रोकने और जमानत की शर्तों का पालन कराने की जिम्मेदारी भी मां की होगी। परिवीक्षा अधिकारी समय-समय पर किशोर की गतिविधियों पर निगरानी रखेंगे। जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत स्वतः निरस्त हो जाएगी।