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नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालात यह हैं कि अस्पतालों से डिस्चार्ज होने के बाद भी करीब 20 प्रतिशत मरीजों को दोबारा भर्ती कराना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों में डर और चिंता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शहर के विभिन्न अस्पतालों में इस समय कुल 149 मरीज भर्ती हैं। इनमें से 20 मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आईसीयू में रखा गया है। अधिकांश मरीज पेट दर्द, उल्टी और दस्त की समस्या से पीड़ित हैं।
स्वजन का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे पूरी सावधानी बरत रहे हैं। मरीजों को समय पर दवाइयां दी जा रही हैं और घर में केवल उबला हुआ पानी ही पिलाया जा रहा है। इसके बावजूद तबीयत में सुधार नहीं हो रहा है। भागीरथपुरा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में रोज ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें पहले अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी थी। यहां प्राथमिक जांच के बाद मरीजों को एंबुलेंस की मदद से फिर से अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वह मरीजों को पांच दिन की दवाई की कीट दी जा रही है। लेकिन कई मरीज दवाओं का डोज पूरा नहीं कर रहे हैं। इससे दोबारा संक्रमण हो सकता है।
डिस्चार्ज के अगले दिन फिर बिगड़ी रजनी की तबीयत भागीरथपुरा निवासी रजनी तीन दिन तक अरविंदों अस्पताल में भर्ती थी। शुक्रवार को उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेज दिया, लेकिन अगले दिन शनिवार को दोबारा तबीयत बिगड़ गई। इसपर दोबारा अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्वजन ने बताया कि अस्पताल से आने के बाद से ही सिर दर्द, पेट दर्द, उल्टी की समस्या हो रही है। इलाज के बाद भी तबीयत बिगड़ती जा रही है। हमने डाक्टरों ने जिस तरह देखभाल के लिए कहा था, उसका भी पालन किया। लेकिन आराम नहीं मिल रहा।
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भागीरथपुरा निवासी दीपक कुशवाह ने बताया कि मैं करीब पांच दिन से उल्टी-दस्त की शिकायत से परेशान हूं। पिछले तीन दिन से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दी जा गई दवाई खा रहा हूं। लेकिन कोई आराम नहीं मिल रहा है। बार-बार यहां समस्या लेकर आ रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मरीजों को देना पड़ी रही दोगुनी एंटियाबोटिक विशेषज्ञों के मुताबिक भागीरथपुरा से जो मरीज आ रहे हैं, उनमें उल्टी-दस्त की शिकायत सामान्य मरीजों से अलग है। दस्त में जहां आमतौर पर दो से तीन आईवी चढ़ाने पर आराम मिल जाता है, लेकिन इन मरीजों को आठ आईवी तक चढ़ाना पड़ रही है।
इसी प्रकार एंटिबायोटिक भी दोगुनी देना पड़ रही है। किडनी-लिवर तक पहुंच रहा संक्रमण अस्पताल में भर्ती कई मरीजों में किडनी-लिवर तक संक्रमण फैल लगा गया है। अस्पताल में भर्ती संतोष बाई की किडनी तक संक्रमण पहुंच गया है। इसी प्रकार 17 वर्ष के पवन के लिवर में संक्रमण बताया गया है। इन मरीजों को निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है।