
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : जिले के शासकीय मंदिरों की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में है। कहीं पुजारी नहीं है तो कहीं प्रबंधन समितियां गठित नहीं हुई है। बैंक खातों की स्थिति भी ऐसी है कि जिले के 979 शासकीय मंदिरों में से केवल 45 के खातों में ही राशि उपलब्ध है। वहीं 74 मंदिरों को जीर्णोद्धार की जरूरत है। वहीं 753 मंदिर ऐसे है, जिनमें पुजारी नहीं हैं।
कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा की गई समीक्षा के दौरान यह स्थिति सामने आई। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए मंदिरों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। जिले में शासकीय मंदिरों का प्रबंधन प्रशासन के अधीन है। इन मंदिरों की संपत्तियों, दान राशि और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। आंकड़ों के मुताबिक 979 मंदिरों में से 753 में पुजारी नहीं है। ऐसे में इन मंदिरों की नियमित पूजा-अर्चना और देखरेख की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे है।
समीक्षा में मंदिरों की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई कमियां सामने आई। अनेक मंदिरों में प्रबंधन समितियां गठित नहीं है, जबकि केवल 45 मंदिरों के बैंक खातों में राशि मौजूद है। इससे मंदिरों की आय, संपत्तियों और रखरखाव की व्यवस्था को लेकर निगरानी की जरूरत सामने आई है। कलेक्टर ने पुजारियों की नियुक्ति, बैंक खाते खुलवाने और मंदिरों की संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
जिले के 74 शासकीय मंदिर ऐसे है, जिन्हें जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर जैसे प्रमुख मंदिरों में बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे है, लेकिन छोटे मंदिरों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। प्रशासन के सामने अब इन मंदिरों की व्यवस्थाएं सुधारने, आवश्यक मरम्मत कराने और संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने की चुनौती है।