
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-देवास बायपास की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की युगलपीठ के समक्ष राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के वकील ने फोटोग्राफ प्रस्तुत कर कहा कि बायपास के गड्ढे भर दिए गए हैं। अब कोई समस्या नहीं है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप मौके पर जाकर देखें और बताएं कि वास्तविकता क्या है। मामले में अब 27 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
हाई कोर्ट में बायपास की बदहाली को लेकर यह जनहित याचिका मातृ फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अमेय बजाज ने वर्ष 2021 में दायर की थी। कहा है कि इंदौर-देवास बायपास की हालत खराब है।
याचिका में बायपास पर मौजूद बड़े-बड़े गड्ढे, बदहाल सर्विस रोड, खुले ड्रेनेज, जलभराव, खराब और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट, दुर्घटना संभावित ब्लैकस्पॉट, अव्यवस्थित ट्रैफिक, तथा जानलेवा सड़क का मुद्दा उठाया है। यह मांग भी की गई है कि एनएचएआइ को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए जाएं।
तीन दिन पहले हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि बायपास की हालत अब भी खराब है। गड्ढे में गिरने से एक महिला की मौत भी हुई है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। इसके चलते हादसे हो रहे हैं।
इस पर कोर्ट ने एनएचएआइ के वकील से कहा था कि वे शुक्रवार को बताएं कि एनएचएआइ ने वर्ष 2023 में हाई कोर्ट द्वारा जारी अंतरिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी गाइडलाइन के बाद में क्या काम किए हैं। शुक्रवार को एनएचएआइ ने फोटोग्राफ प्रस्तुत कर कोर्ट को बताया कि इंदौर-देवास बायपास के गड्ढे भर दिए गए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे मौके पर जाकर देखें और वास्तविकता कोर्ट को बताएं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले हादसों और मौत को गंभीरता से लेते हुए इन पर किसी प्रकार की अवैध पार्किंग, अवैध ढाबों, व्यावसायिक अतिक्रमण, असुरक्षित तरीके से वाहनों को रोके जाने को तत्काल प्रभाव से नियंत्रित करने के लिए आदेश दिया है।
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इसके अलावा एनएचएआइ, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राज्य पुलिस, जिला प्रशासन तथा लोक निर्माण विभाग को संयुक्त रूप से समर्पित निरीक्षण दल, राजमार्ग निगरानी प्रणाली, उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग तथा ई-चालान व्यवस्था लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां उच्च क्षमता वाली प्रकाश व्यवस्था, चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण कैमरे, ट्रक विश्राम स्थल एवं मार्ग-सुविधा केंद्र विकसित करने, आपातकालीन एंबुलेंस, रिकवरी क्रेन तैनात करने, जल निकासी व्यवस्था तथा अतिक्रमण हटाने को सुनिश्चित करने और प्रत्येक जिले में जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्य बल गठित करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने टोल टैक्स को लेकर भी सख्ती दिखाते हुए नियम जारी किए।