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आधा प्रतिशत मंडी शुल्क बढ़ाने के विरोध में प्रदेश की 270 मंडियों में रही हड़ताल, इंदौर में ढाई सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित

प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाये गए आधा प्रतिशत मंडी शुल्क के विरोध में मंगलवार को अनाज, सब्जी, फल मंडी के साथ सियागंज भी बन्द रहा। दाल मिलों ने भी विरोध के ...और पढ़ें

By Lokesh SolankiEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 24 Jun 2026 12:56:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 24 Jun 2026 12:56:27 PM (IST)
आधा प्रतिशत मंडी शुल्क बढ़ाने के विरोध में प्रदेश की 270 मंडियों में रही हड़ताल, इंदौर में ढाई सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित
मंडी टैक्स के विरोध में छावनी अनाज मंडी पूरी तरह बंद रही। (प्रफुल्ल चौरसिया आशु)

HighLights

  1. अनाज-सब्जी मंडी के साथ दाल मिलें और सियागंज भी बंद रहा
  2. एक दिन के इस बन्द से इंदौर में 200 से 250 करोड़ का कारोबार बाधित हुआ
  3. वहीं प्रदेश में कुल प्रभावित होने वाले कारोबार का आंकड़ा हजार करोड़ के पार है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाये गए आधा प्रतिशत मंडी शुल्क के विरोध में मंगलवार को अनाज, सब्जी, फल मंडी के साथ सियागंज भी बन्द रहा। दाल मिलों ने भी विरोध के इस बंद में साथ दिया। सकल अनाज दलहन तिलहन व्यापारी संघ द्वारा घोषित एक दिन के इस सांकेतिक बंद में प्रदेश की 270 अनाज मंडिया बंद रही।

एक दिन के इस बन्द से इंदौर में 200 से 250 करोड़ का कारोबार बाधित हुआ। जबकि प्रदेश में कुल प्रभावित होने वाले कारोबार का आंकड़ा हजार करोड़ के पार है। इंदौर की छावनी और लक्ष्मीबाई अनाज मंडी के साथ देवी अहिल्याबाई होलकर सब्जी, फल व फूल मंडी में भी कारोबार नहीं हुआ। दाल मिलें भी मुकम्मल बन्द रही। सियागंज के थोक किराना बाजार में तो व्यापार नहीं हुआ लेकिन खुदरा कारोबार जारी रहा।देवास कृषि उपज मंडी में दोपहर एक के बाद व्यापार शुरू हो गया। बताया जा रहा है अधिकारी-नेताओं के दबाव में व्यापारियों ने नीलामी में भाग लिया।


बीते वर्षो से अनाज, दलहन और तिलहन व्यापारी लगातार मंडी शुल्क कम करने की मांग कर रहे थे। मप्र, छत्तीसगढ़, गुजरात जैसे राज्यों के मुकाबले पहले ही मप्र में मंडी शुल्क की दर ज्यादा थी। ऐसे में सरकार ने अब शुल्क कम करने की बजाय 16 जून से टैक्स में आधा प्रतिशत की वृद्धि कर डेढ़ प्रतिशत कर दिया।आल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार टैक्स के बोझ से परेशान कई मिलें तो प्रदेश से पलायन कर चुकी है। बची हुई दाल मिलों को बचाने के लिए उद्योग राज्य सरकार से लगातार मांग कर रहा था कि मंडी शुल्क को कम किया जाए लेकिन सरकार ने मंडी शुल्क घटाने के बताये आधा फीसदी शुल्क और बढ़ा दिया। सियागंज व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल, मंत्री प्रतिपाल टोंग्या के अनुसार किराना बाजार में भी 50 से 70 उपज ऐसी है जो मंडी टैक्स के दायरे में आती हैं।आयातित मसाले-उपज पर भी प्रदेश में फिर से टैक्स लिया जाता है।

मध्यप्रदेश शासन द्वारा मंडी शुल्क में की गई वृद्धि के विरोध में इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी संघ के अध्यक्ष मनोज काला,मंत्री राजेश अग्रवाल व पदाधिकारियों,व्यापारियों ने कलेक्टर के नाम एक एडीएम रोशन राय को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संघ ने मंडी शुल्क वृद्धि पर विरोध व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से व्यापारियों, किसानों एवं उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा तथा प्रदेश के कृषि व्यापार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी।

संघ ने शासन से मंडी शुल्क वृद्धि के निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदेश के व्यापारी संगठन सकल अनाज तिलहन व्यापारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गोपालदास अग्रवाल ने कहा कि हम मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांग रहे हैं। किसान और व्यापारियों के हितों की रक्षा हेतु संघ आगे भी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराता रहेगा।मांग नहीं सुनी गई तो आगे प्रदेश स्तर के आंदोलन सतत होंगे। मालवा-निमाड़ के किसान भी साथ है। किसान नेता डीपी. धाकड़ सहित कई किसानों के साथ रतलाम मंडी में भी प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंप मंडी बढ़ाया गया शुल्क वापस लेने की मांग की गई।

इतना कारोबारी नुकसान

अनाज मंडियों में एक ही दिन में करीब 75 से 100 करोड़ का कारोबार होता है। दाल मिलो का कारोबार करीब 20 करोड़ और सियागंज में भी 5 से 7 करोड़ का कारोबार बाधित हुआ। इसी तरह सब्जी, आलू-प्याज और फल फूल मंडी में भी 70 से 100 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। इंदौर शहर में ही एक दिन में ढाई सौ करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान आंका जा रहा है।

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