
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : तीन माह के इंतजार के बाद कानपुर चिड़ियाघर का दरियाई घोड़ा (हिप्पोपोटेमस) सतीश बुधवार रात इंदौर आया। 700 किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में लाए गए सतीश को बुधवार रात एक बजे ही जलकुंड में छोड़ दिया गया।
इसके बाद दिनभर पानी में ही सुस्ता रहा है। मादा दरियाई घोड़ा डिम्पी से भी असहज दिखाई दिया और उसने दूरी बनाई रखी। जू प्रबंधन के अनुसार उस यहां के माहौल में घुलने-मिलने में सप्ताहभर का समय लगेगा।
जू प्रभारी डाक्टर उत्तम यादव ने बताया कि आठ साल का सतीश को एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत लाया गया है। इसके लिए कानपुर जू को शेरनी बिजली दी गई है। अभी हमारे पास एक मादा हिप्पोपोटेमस है। इनका जोड़ा बनने से चिड़ियाघर में दरियाई घोड़ों की संख्या में वृद्धि होगी।
इनके जबड़े शक्तिशाली जबड़े होते है और पानी में घंटों बिताने की आदत होती है। यह अधिकांश समय पानी में आराम के बाद भोजन की तलाश में जमीन पर आते है। अनुकूल परिस्थितियों में यह लगभग 35 से 40 वर्ष या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकता है।
दरियाई घोड़ा मुख्य रूप से शाकाहारी है। इसे हरी घास खाना पसंद है। जंगल में यह सामान्यतः शाम और रात के समय चार से छह घंटे तक घास चर सकता है। एक वयस्क दरियाई घोड़ा प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलोग्राम भोजन खा सकता है।
हालांकि, भोजन की वास्तविक मात्रा उसके वजन, स्वास्थ्य और उपलब्ध चारे पर निर्भर करती है।दिन के समय यह पानी में रहना पसंद करता है। पानी उसके शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और त्वचा को तेज धूप से बचाने में मदद करता है। यह पानी में आराम करने के साथ सो भी सकता है। सांस लेने के लिए यह समय-समय पर पानी की सतह पर आ जाता है।
दरियाई घोड़े की गर्भावधि लगभग आठ महीने होती है और मादा सामान्यतः एक बच्चे को जन्म देती है। मादा अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहती है। समूह में रहने वाले दरियाई घोड़ों में वयस्क नर अपने क्षेत्र को लेकर आक्रामक होते है।
चिड़ियाघर में दरियाई घोड़े की देखभाल के लिए पर्याप्त पानी, उचित आहार, छायादार स्थान और नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है। तेज शोर, छेड़छाड़ या खतरे का एहसास होने पर यह आक्रामक हो सकता है। भारी शरीर के बावजूद यह कम दूरी में तेज दौड़ सकता है। इसलिए इसे शांत देखकर कमजोर या पूरी तरह सुरक्षित समझना गलत होगा।
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