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सावधान! आपकी थाली में पहुंच रहा है 'धीमा जहर', दूध, अंडे और सब्जियों के जरिए शरीर में पहुंच रहा एंटीबायोटिक

Antibiotic Resistance: फसलों व सब्जियों को भी फंगस, बैक्टीरिया व वायरस का संक्रमण होता है। इस तरह डेयरी, पाल्ट्री फार्म व मत्स्य पालन में भी एंटीबायोट...और पढ़ें

By Udaypratap SinghEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 07 Feb 2026 10:06:45 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Feb 2026 10:06:45 PM (IST)
सावधान! आपकी थाली में पहुंच रहा है 'धीमा जहर', दूध, अंडे और सब्जियों के जरिए शरीर में पहुंच रहा एंटीबायोटिक
सावधान! आपकी थाली में पहुंच रहा है 'धीमा जहर'।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। फसलों व सब्जियों को भी फंगस, बैक्टीरिया व वायरस का संक्रमण होता है। इस तरह डेयरी, पाल्ट्री फार्म व मत्स्य पालन में भी एंटीबायोटिक का दुरुपयोग हो रहा है। इनका सेवन करने से मनुष्यों में एंटीबायोटिक का असर पहुंचता है। इसके अलावा इनके संपर्क में आने से मनुष्यों में एंटीबायोटिक का संक्रमण होता है। यही वजह है कि फसलों, पशु, पक्षियों व मछलियों के उपचार में एंटीबायोटिक का उपयोग चिकित्सकों के मार्गदर्शन में उचित डोज दिया जाना चाहिए। पर्याप्त व सही डोज न देने पर इनमें भी दवाओं के प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसीत हो जाती है।

इंसेक्टीसाइड व फंगीसाइड का ज्यादा उपयोग

फसल व सब्जियों में इंसेक्टीसाइड में रेड, ग्रीन व यलो रंग के निशान होते है। लाल रंग वाले हैवी इंसेस्टिसाइड को चने व कपास की फसलों पर इस्तेमाल किया जाता है। वही पीले रंग वाले इंसेक्टिसाइड में मध्यम स्तर का होता है। हरे रंग के निशान वाले इंसेक्टीसाइड का उपयोग सब्जियों पर उपयोग किया जाता है। इसका प्रभाव कुछ समय तक सब्जियों पर रहता है। इसकी वजह से निर्धारित अवधि में इसका उपयोग नहीं किया जाता है। कई बार किसान ज्यादा मात्रा में व हैवी इंसेक्टिसाइड का उपयोग करते है। इनका ज्यादा उपयोग मनुष्यों के लिए नुकसान दायक होता है।


यही वजह है कि अब प्राकृतिक खेती व जैविक खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। सामान्यतः फसल व सब्जियों में बैक्टीरिया व वायरस से बचाव के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का छिड़काव किया जाता है। दवा के उपयोग के आठ से दस दिन तक उसकी बिक्री नहीं करना चाहिए। यदि इस समय के पहले सब्जियों का उपयोग किया जाए तो उसके सेवन से पेटदर्द, उल्टी व मितली आने जैसी परेशानियां हो सकती है।

डोज लगाने के 72 घंटे तक नहीं करना चाहिए उपयोग

दुधारू पशुओं को इसके इंजेक्शन लगाने पर उनके दूध में एंटीबायोटिक का असर रहता है। ऐसे में 72 घंटे के तक उनके दूध का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। जानकारी के अभाव में कई बार ग्रामीण उसके दूध का विक्रय कर देते है। गौ सेवक कई बार अपने हिसाब पशुओं में बीमारी के दौरान एंटीबायोटिक दे देते है। कई हायर एंटीबायोटिक भी दे देते है। उससे पशुओं के दूध व व मुर्गियों के अंडों में एंटी बायोटिक आ जाते है। वही दूध व अंडे मनुष्य उपयोग करते है। ऐसे में मनुष्यों में एंटीबायोटिक का प्रतिरोध आ जाते है। इतना ही नहीं मछलियों व लव बर्ड्स जैसे पक्षियों को भी एंटीबायोटिक दवा दी जाती है। स्थिति यह है कि पशु पक्षियों में भी दवा के प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसित हो गई है। ऐसे में अब उन पर नार्मल एंटीबायोटिक काम नहीं करती है। अब उन पर सेकेंड व थर्ड जनरेशन के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जा रहा है। पशु चिकित्सकों के पास प्रतिवर्ष 40 से 50 फीसदी कैसे दवा के प्रतिरोध के आ रहे है।

यह भी पढ़ें- भोपाल में फसलों और पशुओं पर एंटीबायोटिक्स का छिड़काव, इंसानों में 'रेजिस्टेंस' का बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों की सलाह

इंसेक्टिसाइड व फंगीसाइड का असर खत्म होने के बाद हो उपयोग

फसल व सब्जियों में इसेक्टीसाइड व फंगीसाइड का उपयोग किया जाता है। इनके छिड़काव की अवधि के दौरान उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। जब इनका असर खत्म हो जाए,उसके बाद उसका सेवन किया जाना चाहिए।- सी एल केवड़ा, उपसंचालक कृषि विभाग

फसल व सब्जियों को होता बैक्टीरिया व वायरस का संक्रमण

फसलों व सब्जियों को भी बैक्टरिया व वायरस का संक्रमण होता है। इसके लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है। यह मनुष्यों की बीमारी में उपयोग होने वाले एंटीबायोटिक से भिन्न होती है। फसलों व सब्जियों के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटी बायोटिक की मात्रा निर्धारित होती है। कई बार किसान जानकारी के अभाव में कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बगैर दवाओं का उपयोग करते है। इससे फसल व सब्जियों में दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसीत होता है। जब मनुष्य इस तरह की फसलों व सब्जियों का सेवन करता है तो उसे भी नुकसान होता है।- धर्मेंद्र नरवरिया, कृषि विशेषज्ञ

जानकारी के अभाव में पशुओं को लगा देते है हायर एंटीबायोटिक

प्रदेश में पांच हजार वेटरनरी चिकित्सकों की जरुरत है लेकिन अभी 1500 से दो हजार ही मौजूद है। कई पशु चिकित्सक गांवों में जाना नहीं जाते और कुछ चिकित्सक पालतू स्वान के इलाज में रूचि लेते है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में तीन माह कोर्स करने वाले गौ सेवक ही पशुओं के उपचार में अहम भूमिका हो रहे है। इन्हें प्राथमिक चिकित्सा के लिए रखा गया है लेकिन जानकारी के अभाव में यह एंटीबायोटिक भी पशुओं को लगा देते है। पशुओं में बैक्टीरिया व वायरल इंफेक्शन होने व गाय व भैंस में थनेला रोग होने पर उन्हें एंटीबायोटिक दवा दी जाती है।- डॉ. संदीप नानावटी, प्रोफेसर शासकीय वेटरनरी कालेज महू