
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति से जुड़े मामले को लेकर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। यह याचिका भागीरथपुरा में लंबे समय से चल रही पेयजल समस्या और दूषित पानी कांड को लेकर दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में आज भी कई गलियों तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नगर निगम टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई करने का दावा कर रहा है, लेकिन क्षेत्र की गलियां इतनी सकरी हैं कि टैंकर वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने निगम की इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां संकरी गलियों में पानी पहुंचा सकती हैं, तो फिर नगर निगम पानी के टैंकर वहां क्यों नहीं पहुंचा पा रहा है। इस तर्क को सुनकर कोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया।
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बताया कि भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से संबंधित कुछ अन्य जनहित याचिकाएं पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन याचिकाओं पर 15 जनवरी को सुनवाई निर्धारित है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान याचिका को भी उन्हीं मामलों के साथ सुना जाएगा।
कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब इस जनहित याचिका पर भी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ 15 जनवरी को सुनवाई की जाएगी। इससे पहले दाखिल सभी याचिकाओं को एक साथ लेकर मामले की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
यह जनहित याचिका एडवोकेट मोहनसिंह चंदेल और एडवोकेट केके गुप्ता द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं और पीने के लिए शुद्ध पानी तक उपलब्ध नहीं है।
याचिका में हाई कोर्ट से मांग की गई है कि नगर निगम को निर्देश दिए जाएं कि वह किसी वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए क्षेत्र की गलियों तक नियमित और स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
इसके साथ ही याचिका में भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि लापरवाही के कारण लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हुआ है।