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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : कितने शवों का पोस्टमार्टम हुआ था, स्पष्ट नहीं, एक डॉक्टर बोले दो, दूसरे ने कहा चार

भागीरथपुरा के जलस्रोत्र मई 2026 तक दूषित पानी उगल रहे थे। 15 मई 2026 को 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे। इनमें से 18 सैंपल दूषित थे। इन जलस्रोतों का प...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 02 Sep 2026 09:21:17 PM (IST)Updated Date: Wed, 02 Sep 2026 09:21:17 PM (IST)
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड : कितने शवों का पोस्टमार्टम हुआ था, स्पष्ट नहीं, एक डॉक्टर बोले दो, दूसरे ने कहा चार
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में कई लोगों की हुई थी मौतें और कई लोग पड़ गए थे बीमार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही आयोग के सामने नहीं आई
  2. मई में भी दूषित था भागीरथपुरा के जलस्रोतों का पानी
  3. 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे, इनमें से 18 सैंपल दूषित थे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : भागीरथपुरा के जलस्रोत्र मई 2026 तक दूषित पानी उगल रहे थे। 15 मई 2026 को 24 जलस्रोतों से सैंपल लिए गए थे। इनमें से 18 सैंपल दूषित थे। इन जलस्रोतों का पानी पीने के योग्य तो दूर रोजमर्रा के कामकाज के लायक तक नहीं था।

जांच आयोग ने भी माना कि दूषित पानी की वजह से भागीरथपुरा में 24 मौत हुई थी, लेकिन इनमें से कितने शवों का पोस्टमार्टम हुआ था, यह भी स्पष्ट नहीं है। एक डाक्टर का कहना है कि सिर्फ दो शवों का पोस्टरमार्टम हुआ था जबकि दूसरे डाक्टर यह संख्या चार बता रहे हैं। आयोग के सामने पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक प्रस्तुत नहीं की गई।


यह जानकारी भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में प्रस्तुत एक सदस्यीय जांच आयोग की जांच रिपोर्ट के अवलोकन में सामने आई है। दूषित पानी कांड को लेकर आधा दर्जन जनहित याचिकाएं हाई कोर्ट में चल रही हैं। इन याचिकाओं से जुड़े अधिवक्ता इन दिनों रजिस्ट्रार कार्यालय में इस रिपोर्ट का अवलोकन कर नोट बना रहे हैं। बुधवार को भी कुछ वकील रिपोर्ट का अवलोकन करने पहुंचे।

सीधे जिम्मेदार माना अधिकारियों को

रिपोर्ट में महापौर परिषद सदस्यों को भले ही आयोग ने क्लिनचीट दे दी, लेकिन नगर निगम के कुछ जिम्मेदारों को घटना के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने जांच में माना है कि तकनीकी और आर्थिक प्रक्रिया, समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने और गैर जिम्मेदाराना निगरानी के लिए प्रथमदृष्टत: एक्जीक्यूटीव इंजीनियर संजीव कुमार श्रीवास्तव जिम्मेदार हैं। इसके अलावा भी कुछ और अधिकारियों को अधिकारियों को जिम्मेदार माना है।

दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके आईडीए और निगम

जांच आयोग की रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि आइडीए और निगम भागीरथपुरा क्षेत्र की पाइप लाइन के रखरखाव संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सके। निगम के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2010 में दस्तावेज नष्ट हो गए थे।

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