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इंदौर भागीरथपुरा कांड में 5 नवंबर को अंतिम बहस... गंदे पानी की 2018 से थी जानकारी, फिर भी सोता रहा निगम

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट पर सोमवार को हाई कोर्ट में बहस होना थी, लेकिन एक याचिकाकर्ता के वकील ने यह कहते हुए समय ले लिया कि जांच रिप...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 06:39:29 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 06:39:29 PM (IST)
इंदौर भागीरथपुरा कांड में 5 नवंबर को अंतिम बहस... गंदे पानी की 2018 से थी जानकारी, फिर भी सोता रहा निगम
इंदौर भागीरथपुरा कांड

HighLights

  1. भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी
  2. जांच आयोग ने रिपोर्ट में 22 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की
  3. गंदे पानी की जानकारी 2018 से होने के बावजूद लापरवाही बरती गई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच रिपोर्ट पर सोमवार को हाई कोर्ट में बहस होना थी, लेकिन एक याचिकाकर्ता के वकील ने यह कहते हुए समय ले लिया कि जांच रिपोर्ट विस्तृत है। इसे पढ़ने में समय लगेगा। कोर्ट मामले में अब 5 नवंबर को सुनवाई करेगी।

दिसंबर-जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौत हुई थी। मामले को लेकर हाई कोर्ट में सात जनहित याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। लगभग ढाई माह पहले आयोग अपनी सील बंद रिपोर्ट कोर्ट को दे चुका है।


कोर्ट के आदेश के बाद 600 से ज्यादा पेज की इस रिपोर्ट को हाई कोर्ट की साइट पर अपलोड कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट मनीष यादव, रितेश इनाणी ने बताया कि सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने रिपोर्ट पढ़ने के लिए समय ले लिया। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 5 नवंबर को तय की है।

2018 से थी दूषित पानी की जानकारी, अधिकारियों की लापरवाही उजागर

जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट के अंतिम 112 पेजों में सार दिया है। इसमें स्वीकरा है कि अधिकारियों को वर्ष 2018 से ही पता चल गया था कि शहर के एक बड़े हिस्से में दूषित पानी सप्लाइ हो रहा है, बावजूद इसके उन्होंने लापरवाही की। कोई प्रभावी सुधार नहीं किया। भागीरथपुरा के रहवासी सितंबर से लगातार गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया। रिपोर्ट में नई पेयजल लाइन के टेंडर की प्रक्रिया में 20 माह की देरी का भी उल्लेख किया गया है। यह बात भी जांच में सामने आई कि टेंडर स्वीकृति की फाइलें जानबूझकर लंबित रखी गईं।

22 मौतों की पुष्टि, 10 लाख मुआवजे और अलग जल-मल बोर्ड की सिफारिश

आयोग ने पेयजल और ड्रेनेज लाइन बिछाने में हुई गड़बडियों की ओर भी इशारा किया है और माना कि दोनों लाइनों के एक साथ बिछाने से पेयजल दूषित होने की स्थिति बनी। आयोग ने नगर निगम से पेयजल और ड्रेनेज व्यवस्था का काम लेकर अलग जल-मल बोर्ड गठित करने की सिफारिश भी की है। आयोग ने भागीरथपुरा में 22 लोगों के दूषित पानी की वजह से मरने की पुष्टि की है। जबकि शेष मौत को लेकर लिखा है कि कारण स्पष्ट नहीं। आयोग ने दूषित पानी की वजह से मारे गए लोगों के स्वजन को 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिए जाने की सिफारिश की है।

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